नयी दिल्ली, नौ जून (भाषा) केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने रेलवे बोर्ड को सूचित किया है कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव ड्यूटी के लिए तैनात सैनिकों के आवागमन के लिए चलाई गईं विशेष रेलगाड़ियों के परिचालन में 10 से 25 घंटे तक की देरी होने के कारण जवानों को समय पर भोजन नहीं मिल सका और उन्हें नाश्ता शाम पांच बजे मिला।
निर्वाचन प्रक्रिया के अंतिम चरण में सीआरपीएफ के महानिरीक्षक (अभियान) द्वारा लिखे गए विस्तृत पत्र में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए तैनात कर्मियों को हुईं परिचालन संबंधी कई दिक्कतों का उल्लेख किया गया।
पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को दूसरे और अंतिम चरण का मतदान संपन्न होने से पहले भेजे गए इस पत्र में सैन्य बलों की वापसी के लिए बेहतर व्यवस्था करने का भी अनुरोध किया गया था।
रेलवे बोर्ड के अधिकारियों ने पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस मुद्दे को संज्ञान में लाए जाने के बाद उन्हें दूर करने के लिए पर्याप्त कदम उठाए गए।
पत्र के अनुसार, जवानों को लाने- ले जाने के लिए चलाई गईं 230 विशेष रेलगाड़ियों में से करीब 200 के परिचालन में काफी देरी हुई।
पत्र में कहा गया, ‘‘चुनाव संबंधी 150 से अधिक विशेष ट्रेन अत्यधिक विलंब से चलीं और अपने गंतव्य स्थल पर 10 से 15 घंटे की देरी से पहुंचीं, जबकि 50 विशेष ट्रेन अपने गंतव्य स्थलों पर 20 से 25 घंटे की देरी से पहुंचीं।’’
इन देरी के कारण ट्रेन में भोजन उपलब्ध कराने का निर्धारित कार्यक्रम बुरी तरह बाधित हुआ।
पत्र में कहा गया, ‘‘रेलगाड़ियों के अत्यधिक विलंब से चलने का जवानों को ट्रेन में निर्धारित समय पर भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर क्रमिक असर पड़ा।’’
इसमें कहा गया कि कई मौकों पर कर्मियों को दिन का उनका पहला आहार यानी नाश्ता शाम पांच बजे मिल पाया।
सीआरपीएफ ने कहा कि भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) द्वारा भोजन के समय में बदलाव करने के प्रयास ट्रेन के विलंब का अनुमान नहीं लग पाने के कारण प्रभावी साबित नहीं हुए।
पत्र में इस विलंब के कारण महत्वपूर्ण कार्य-घंटों की बर्बादी का मुद्दा भी उठाया गया।
सीआरपीएफ ने कहा कि परिचालन संबंधी चिंताएं केवल विलंब तक सीमित नहीं थीं और कई रेलगाड़ियों में पर्याप्त संख्या में डिब्बे भी उपलब्ध नहीं कराए गए।
पत्र में कहा गया, ‘‘चुनाव संबंधी प्रत्येक विशेष ट्रेन में 24 डिब्बों की मांग किए जाने के बावजूद कई रेलगाड़ियों में केवल 19-20 डिब्बे उपलब्ध कराए गए, जो 10-11 कंपनियों और उनसे जुड़े सामान/भंडार सामग्री को आसानी से रखने के लिए अत्यंत अपर्याप्त थे।’’
पत्र में कहा गया, ‘‘ऐसी जानकारी मिली है कि सैनिकों को ठूंस-ठूंस कर भरी हुई रेलगाड़ियों में जबरन बिठाया गया, जिसके परिणामस्वरूप लंबी और कठिन यात्रा के दौरान उन्हें अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ा।’’
डिब्बों में सफाई को लेकर चिंता जताते हुए महानिरीक्षक (अभियान) ने कहा कि कई मौकों पर ट्रेन के तय यात्रा कार्यक्रम के अनुसार निर्धारित रेलवे स्टेशन पर ये सेवाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, जिसके कारण डिब्बों में अस्वच्छता की स्थिति बनी और कर्मियों, विशेषकर महिला कर्मियों, के स्वास्थ्य और सुविधा पर प्रतिकूल असर पड़ा।
भाषा सिम्मी दिलीप
दिलीप