अगरतला, नौ जून (भाषा) त्रिपुरा के समाज कल्याण और सामाजिक शिक्षा मंत्री टिंकू रॉय ने मंगलवार को कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में प्रशासनिक दखल से राज्य भर में बाल विवाह के नौ हजार से ज्यादा मामलों को सफलतापूर्वक रोका गया।
आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, झारखंड, राजस्थान, तेलंगाना, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में बाल विवाह की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
उन्होंने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘जिला प्रशासन, पुलिस और ग्राम पंचायतों समेत सभी संबंधित पक्षों की बेहतर तालमेल वाली कोशिशों के कारण हर साल बाल विवाह रोकने के मामलों में बढ़ोतरी हो रही है।’
उन्होंने कहा, ‘वर्ष 2025-26 के दौरान, राज्य में सभी संबंधित पक्षों ने मिलकर बाल विवाह के 9,982 मामलों को रोका। हालांकि हमारे पास संपन्न हुए बाल विवाह का सटीक आकंड़ा नहीं है।’
रॉय ने कहा कि सेपाहिजाला जिले के सोनामुरा और उनाकोटी जिले के कैलाशहर जैसे उप-संभाग में बाल विवाह अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है।
उन्होंने कहा, ‘बाल कल्याण कमेटी, कई गैर-सरकारी संगठन और त्रिपुरा बाल अधिकार आयोग भी बाल विवाह को रोकने के लिए प्रयासरत हैं।’
रॉय ने एक अन्य मुद्दे पर बताया कि लगभग 10,000 आंगनवाड़ी केंद्रों में से 3,000 से ज्यादा केंद्रों में बिजली का कनेक्शन दिया जा चुका है और बाकी केंद्रों को चालू वित्त वर्ष में यह सुविधा मिल जाएगी।
मंत्री ने यह भी कहा कि अभिभावकों के अनुरोध पर, बंगाली-माध्यम में पढ़ाई की सुविधा देने वाले लगभग 100 आंगनवाड़ी केंद्रों को अंग्रेजी माध्यम में बदल दिया गया है।
उन्होंने कहा, ‘इस कदम से आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों को भाषा की समस्या के बिना विद्याज्योति स्कूलों (सीबीएसई) में दाखिला लेने में मदद मिलेगी।’
भाषा
राखी नरेश
नरेश