यूसीसी से आदिवासियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, समुदाय दुष्प्रचार के झांसे में न आए : अमित शाह

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यूसीसी से आदिवासियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, समुदाय दुष्प्रचार के झांसे में न आए : अमित शाह

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  • Publish Date - May 24, 2026 / 10:32 PM IST,
    Updated On - May 24, 2026 / 10:32 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) आदिवासियों को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करेगी। उन्होंने समुदाय से इस मुद्दे पर फैलाए जा रहे ‘‘दुष्प्रचार’’ के झांसे में न आने का आग्रह किया।

आदिवासी नायक बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में जनजातीय सुरक्षा मंच द्वारा लाल किला मैदान में आयोजित ‘जनजातीय सांस्कृतिक समागम’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी को लागू करने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, ताकि जनजातीय समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा जा सके।

शाह ने कहा, ‘‘अब एक साजिश शुरू हो गई है जिसमें दावा किया जा रहा है कि समान नागरिक संहिता आदिवासी समुदायों को उनकी संस्कृति, परंपराओं और अपने रीति-रिवाजों के अनुसार जीने के अधिकार से वंचित कर देगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आज, इस मंच से, नरेन्द्र मोदी सरकार में गृह मंत्री के रूप में, मैं यह बिल्कुल स्पष्ट करना चाहता हूं कि यूसीसी का कोई भी प्रावधान आदिवासी समुदायों या वनवासी समाज पर थोपा नहीं जाएगा।’’

शाह ने कहा कि जिन भी राज्यों में भाजपा सरकारों ने यूसीसी लागू किया है, मोदी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी आदिवासी समुदाय इसके दायरे से बाहर रहें।

गृह मंत्री ने आदिवासी समुदायों से प्रस्तावित कानून से भयभीत न होने का आग्रह किया और लोगों से गांवों एवं वन क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने की अपील की।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं भ्रम फैलाने वाले सभी लोगों को बताना चाहता हूं कि यूसीसी किसी भी आदिवासी या वनवासी भाई या बहन की परंपराओं और रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।’’

नक्सलवाद का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि देश इस समस्या से मुक्ति की ओर अग्रसर है, और दावा किया कि हिंसा के कारण दशकों से आदिवासी विकास प्रभावित हुआ है।

शाह ने कहा, ‘‘आज आदिवासी समुदायों के इस कुंभ में मैं गर्व से कह सकता हूं कि हमारा देश नक्सल समस्या से पूर्णतः मुक्त होने की ओर अग्रसर है।’’

गृह मंत्री ने आदिवासी क्षेत्रों में धर्मांतरण का भी विरोध किया और कहा कि किसी को भी किसी दूसरे व्यक्ति का धर्म जबरन बदलने का अधिकार नहीं है।

शाह ने कहा, ‘‘हमारे संविधान निर्माताओं ने प्रत्येक व्यक्ति को अपने मूल धर्म और परंपराओं के अनुसार गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार दिया है। किसी का भी धर्म बदलने के लिए लालच, प्रलोभन या दबाव का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।’’

उन्होंने आदिवासी कल्याण पर होने वाले खर्च को लेकर पिछली कांग्रेस सरकारों पर भी निशाना साधा और दावा किया कि मोदी सरकार ने इस समुदाय के लिए बजट में काफी वृद्धि की है।

शाह ने कहा, ‘‘पहले आदिवासी कल्याण के लिए कुल बजट मात्र 28,000 करोड़ रुपये था। नरेन्द्र मोदी ने इसे बढ़ाकर 1.54 लाख करोड़ रुपये कर दिया है।’’

भाषा शफीक दिलीप

दिलीप