केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा नये सिरे से लागू करेंगे ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा नये सिरे से लागू करेंगे ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’
नयी दिल्ली, 28 जून (भाषा) भारत में एनीमिया (रक्त की कमी) से निपटने के प्रयासों को गति देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा सोमवार को यहां होने वाली केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (सीसीएचएफडब्ल्यू) की 16वीं बैठक में ‘एनीमिया मुक्त भारत (एएमबी) अभियान’ के क्रियान्वन के लिए दिशानिर्देश जारी करेंगे।
मंत्रालय ने एक बयान में बताया इन दिशा-निर्देशों के तहत मौजूदा रणनीति के ढांचे में विस्तार किया जाएगा।
बयान में बताया गया कि इसमें सातवां लाभार्थी समूह, सातवां उपाय और सातवां संस्थागत तंत्र शामिल किया जाएगा।
बयान के मुताबिक, जीवन के प्रारंभिक चरण से ही एनीमिया की समस्या के समाधान के महत्व को देखते हुए, जन्म के समय कम भार (एलबीडब्ल्यू) वाले शिशुओं (0-6 महीने) को सातवें लाभार्थी समूह के रूप में शामिल किया जाएगा।
बयान में बताया गया कि आयरन युक्त और विविध आहारों के नियमित सेवन को दैनिक आदत के रूप में ‘सही खान-पान’ के दृष्टिकोण को सातवें उपाय के रूप में शामिल किया जाएगा जबकि डिजिटल ट्रैकिंग द्वारा समर्थित एक मजबूत निगरानी और मूल्यांकन ढांचा सातवें संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करेगा।
बयान के मुताबिक, ‘इस अभियान की एक प्रमुख विशेषता टी3 (जांच, उपचार, चर्चा) से टी4 (जांच, उपचार, चर्चा और निगरानी) दृष्टिकोण में परिवर्तन होगा। संशोधित रणनीति में हीमोग्लोबिन की जांच को और गहन बनाने, राष्ट्रीय एनीमिया प्रबंधन प्रोटोकॉल के अनुसार आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया का उपचार करने, लाभार्थियों की व्यवस्थित निगरानी करके उन्हें ‘रेफरल’ और ‘फॉलो-अप’ के लिए भेजने और स्वस्थ आहार संबंधी आदतों को प्रोत्साहित करने के लिए लक्षित परामर्श देने पर जोर दिया जाएगा।”
बयान में बताया गया कि गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में गंभीर एनीमिया और उपचार के प्रति अनुत्तरदायी मामलों के प्रबंधन के लिए, फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (एफसीएम) और आयरन सुक्रोज का उपयोग कर आयरन थेरेपी को एक महत्वपूर्ण नैदानिक उपाय के रूप में शामिल किया जाएगा।
इन दिशा-निर्देशों के माध्यम से लाभार्थी समूहों में एनीमिया सेवाओं की निगरानी के लिए एक मजबूत डिजिटल प्रणाली स्थापित की जाएगी।
गर्भवती महिलाओं के हीमोग्लोबिन की जांच के रिकॉर्ड जननी पोर्टल के माध्यम से एकत्र किए जाएंगे जबकि बच्चों के रिकॉर्ड आरबीएसके और यू-विन पोर्टल के माध्यम से प्राप्त किए जाएंगे।
सीसीएचएफडब्ल्यू की 16वीं बैठक के दौरान क्रियान्वन दिशा-निर्देशों का विमोचन पोषण और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिए सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराएगा तथा एक स्वस्थ एवं एनीमिया मुक्त भारत की दिशा में प्रगति को और तेज करेगा।
भाषा जितेंद्र देवेंद्र
देवेंद्र

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