प्राचीन नालंदा विवि देखने जाने वाले जल्द ही प्रौद्योगिकी के जरिये इसकी श्रेष्ठता को महसूस करेंगे |

प्राचीन नालंदा विवि देखने जाने वाले जल्द ही प्रौद्योगिकी के जरिये इसकी श्रेष्ठता को महसूस करेंगे

प्राचीन नालंदा विवि देखने जाने वाले जल्द ही प्रौद्योगिकी के जरिये इसकी श्रेष्ठता को महसूस करेंगे

: , January 25, 2023 / 07:37 PM IST

नयी दिल्ली, 25 जनवरी (भाषा) बिहार में प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय स्थल को देखने जाने वाले शीघ्र ही इस ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान की श्रेष्ठता को महसूस कर सकेंगे क्योंकि संस्कृति मंत्रालय इस धरोहर को पुनर्निर्मित करने के लिए एक डिजिटल परियोजना पर काम कर रहा है।

केंद्रीय संस्कृति सचिव गोविंद मोहन ने यहां संवाददाताओं से कहा कि अप्रैल तक पायलट परियोजना की शुरूआत करने की योजना है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम आगंतुकों को डिजिटिल प्रौद्योगिकी के जरिये अधिक अनुभूति देना चाहते हैं। आज लोग नालंदा विश्वविद्यालय के सिर्फ भग्नावशेषों को ही देख पाते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसका एक गौरवशाली इतिहास रहा है और चीनी यात्री फाहियान सहित अन्य ने वहां की यात्रा की थी। शोध अभी जारी है और हम चाहते हैं कि लोग ‘संवर्धित रियलिटी-वर्चुअल रियलिटी’ परियोजना के जरिये ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय की श्रेष्ठता को महसूस करें।’’

उल्लेखनीय है कि संवर्धित रियलिटी में वास्तविक जगत और कंप्यूटर सृजित सामग्री होती है, जबकि वर्चुअल रियलिटी में उपयोगकर्ता को आभासी जगत महसूस कराने के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाता है।

मोहन ने कहा कि इसी तरह की परियोजनाओं की योजना हरियाणा में राखीगढ़ी और गुजरात के धौलावीरा जैसे स्थलों के लिए बनाई गई है। ये दोनों हड़प्पाकालीन स्थल हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हम इसकी शुरूआत नालंदा से करना चाहते हैं और एक उदाहरण स्थापित करना चाहते हैं।’’

उल्लेखनीय है कि नालंदा महाविहार के भग्नावशेष को 2016 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया था।

भाषा सुभाष प्रशांत

प्रशांत

 

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