भीषण गर्मी के बीच जोधपुर में गहराया जल संकट, इंदिरा गांधी नहर में पानी पहुंचने में देरी
भीषण गर्मी के बीच जोधपुर में गहराया जल संकट, इंदिरा गांधी नहर में पानी पहुंचने में देरी
जोधपुर, 19 मई (भाषा) राजस्थान में भीषण गर्मी के बीच जोधपुर जिला जल संकट का सामना कर रहा है और अधिकारियों का कहना है कि रखरखाव कार्य के लिए वार्षिक बंदी के बाद पंजाब के हरिके बैराज से इंदिरा गांधी नहर में पानी छोड़े जाने में देरी के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के मुख्य अभियंता देवराज सोलंकी ने बताया कि पंजाब सरकार की अधिसूचना के अनुसार नहर को 10 मई तक बंद रखा जाना था और 11 मई से हरिके बैराज से पानी छोड़ा जाना निर्धारित था।
उन्होंने कहा, “हालांकि पंजाब क्षेत्र में मरम्मत और तकनीकी कार्य समय पर पूरा नहीं होने के कारण पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़े जाने में देरी हुई।”
सोलंकी ने बताया कि 14 मई से चरणबद्ध तरीके से हरिके बैराज से नहर में पानी छोड़ा गया। विभाग को उम्मीद है कि यह पानी 20 मई की रात या 21 मई की सुबह तक जोधपुर के कायलाना झील और तख्त सागर जलाशयों तक पहुंच जाएगा, जो शहर के प्रमुख जल स्रोत हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में इन दोनों जलाशयों में इतना ही पानी बचा है, जिससे नहर का पानी पहुंचने तक शहर की जरूरतें पूरी हो सकें।
पीएचईडी के अधीक्षण अभियंता (शहर) राजेंद्र मेहता ने कहा कि जलाशयों तक पानी पहुंचने के बाद भी उन्हें सामान्य स्तर तक भरने में करीब दो सप्ताह का समय लगेगा।
उन्होंने कहा, “इसके बाद ही शहर की जलापूर्ति सामान्य हो सकेगी। इस स्थिति को देखते हुए 21 मई को एक दिन की जलापूर्ति बंद रखने की योजना बनाई जा रही है, ताकि अगले दिन पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।”
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी जल संकट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जोधपुर में पेयजल की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है।
उन्होंने कहा, “पूरे शहर में भारी परेशानी है और हालात लगभग जल आपातकाल जैसे हो गए हैं। खबरें हैं कि कायलाना और तख्त सागर में केवल दो दिन का पानी बचा है। करीब 20 लाख आबादी वाला शहर गंभीर जल संकट के मुहाने पर खड़ा है, जबकि सरकार चुप है।”
गहलोत ने पीएचईडी की तैयारियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “क्या यह पूर्व तैयारी की कमी को नहीं दर्शाता? क्या कोई ठोस जल प्रबंधन योजना नहीं बनाई गई थी? अब जब जल संकट सामने है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?”
भाषा मनीषा वैभव
वैभव

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