सुप्रीम कोर्ट ने कहा महिलाओं का खतना उनकी निजता का उल्लंघन है
सुप्रीम कोर्ट ने कहा महिलाओं का खतना उनकी निजता का उल्लंघन है
नई दिल्ली। करीब एक माह पहले सुप्रीम कोर्ट ने लड़कियो के खतने पर सवाल उठाया था। जिसके तहत उन्होंने कहा था कि यह बच्ची की शारीरिक संरचना का उल्लंघन करता है। ज्ञात हो कि दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में लड़कियों का खतना करने की प्रथा है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की है.इस पर कोर्ट ने अपनी टिपण्णी में कहा है कि क्या महिलाएं सिर्फ पति के लिए उपभोग की चीज है। जिसके लिए उसकी नीची अंगो से छेड़छाड़ की जा रही है।
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सोमवार को इस मसले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि महिलाओं का जीवन केवल शादी और पति के लिए नहीं होता है. शादी के अलावा भी महिलाओं के दायित्व होते हैं. इस मामले में कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये महिला पर निर्भर करता है कि वह पुरुष के साथ संबंध बनाना चाहती है या नहीं। कोर्ट ने महिलाओं के खतने वाली प्रथा को निजता के अधिकार का उल्लंघन माना है. साथ ही ये भी कहा है कि यह लैंगिक संवेदनशीलता का मामला है और ऐसा किया जाना स्वास्थ्य ने लिए हानिकारक हो सकता है।
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दरअसल, दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में नाबालिग लड़कियों की ‘खतना प्रथा’ के खिलाफ कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं. केंद्र सरकार ने भी इन याचिकाओं का समर्थन किया है. याचिकाकर्ता की वकील इंदिरा जयसिंह ने अपनी दलील में कहा कि किसी भी आपराधिक कृत्य को इस आधार पर इजाजत नहीं दी सकती कि वह प्रैक्टिस का हिस्सा है. उन्होंने अपनी दलील में साफ कहा कि प्राइवेट पार्ट को छूना पॉस्को एक्ट के तहत अपराध है।
वेब डेस्क IBC24

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