वैश्विक स्तर पर सौम्य शक्ति के रूप में उभर रहा है योग: आयुष सचिव
वैश्विक स्तर पर सौम्य शक्ति के रूप में उभर रहा है योग: आयुष सचिव
(पायल बनर्जी)
नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) योग भारत की सांस्कृतिक पहुंच और वैश्विक सौम्य शक्ति के सबसे प्रभावशाली माध्यमों में से एक बनकर उभरा है, वहीं जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से मुकाबले में यह एहतियाती स्वास्थ्य देखभाल के एक केंद्रीय स्तंभ के रूप में भी स्थापित हुआ है। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने यह बात कही।
इक्कीस जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले कोटेचा ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि योग को अब केवल पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धति के रूप में नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से समर्थित जनस्वास्थ्य हस्तक्षेप के तौर पर भी तेजी से मान्यता मिल रही है, जिसे दुनिया भर में स्वास्थ्य प्रणालियों, शैक्षणिक संस्थानों, कार्यस्थलों और डिजिटल मंचों में एकीकृत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “योग भारत की सांस्कृतिक पहुंच और वैश्विक सौम्य शक्ति के सबसे प्रभावशाली माध्यमों में से एक बनकर उभरा है।”
उन्होंने कहा, “190 से अधिक देशों में इसकी स्वीकृति इसकी उस सार्वभौमिक प्रासंगिकता को दर्शाती है, जो भौगोलिक सीमाओं, भाषा और संस्कृति से परे है। आने वाले दशक में योग के वैश्विक स्तर पर रोग-निवारक स्वास्थ्य देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य और समग्र जीवनशैली को बढ़ावा देने में और बड़ी भूमिका की उम्मीद है।”
कोटेचा ने कहा कि भारत के राजनयिक मिशन और अंतरराष्ट्रीय सहयोगों ने लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने तथा वैश्विक कल्याण में योगदान देने में योग की भूमिका को सशक्त बनाने में मदद की है।
उन्होंने कहा, ‘भारत योग को न केवल एक सांस्कृतिक विरासत के रूप में देखता है, बल्कि इसे विश्व स्तर पर स्वस्थ समाजों के लिए एक व्यावहारिक और समावेशी दृष्टिकोण के रूप में भी देखता है।’
गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी), तनाव संबंधी बीमारियों और मानसिक स्वास्थ्य विकारों में बढ़ोतरी का उल्लेख करते हुए कोटेचा ने कहा कि मंत्रालय स्वास्थ्य सेवा को उपचार-आधारित प्रणाली से रोकथाम-केंद्रित मॉडल में बदलने के लिए काम कर रहा है, जिसमें योग की केंद्रीय भूमिका है।
अधिकारी ने कहा, ‘‘जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां बढ़ने के मद्देनजर मंत्रालय स्वास्थ्य सेवा को उपचार-आधारित मॉडल से रोकथाम-केंद्रित दृष्टिकोण में बदलने के लिए काम कर रहा है, जिसके केंद्र में योग है।’’
इस रणनीति के अंतर्गत, मंत्रालय ने वैज्ञानिक प्रमाणों और क्लीनिकल अनुसंधान पर आधारित एक व्यापक ‘गैर-संक्रामक रोगों और लक्षित समूहों के लिए योग प्रोटोकॉल’ शुरू किया है।
इस प्रोटोकॉल में आसन, प्राणायाम, ध्यान और विश्राम तकनीकों से युक्त संरचित मॉड्यूल शामिल हैं, जिन्हें विशिष्ट स्वास्थ्य स्थितियों और आयु समूहों के अनुरूप बनाया गया है।
अधिकारी ने कहा, ‘हमने जीवन के विभिन्न चरणों के लिए लक्षित योग मॉड्यूल विकसित किए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि योग सभी आयु समूहों के लिए प्रासंगिक बना रहे, जिसमें वृद्धावस्था देखभाल और मानसिक स्वास्थ्य भी शामिल है।’
कोटेचा ने कहा कि ‘नमस्ते योग ऐप’ जैसे डिजिटल मंच निर्देशित सत्र, साझा योग प्रोटोकॉल, निर्देशात्मक वीडियो मुहैया करा रहे हैं जिन तक कहीं से भी पहुंच बनायी जा सकती है।
उन्होंने कहा, ‘‘डिजिटल पहुंच से विशेष रूप से युवाओं, कामकाजी पेशेवरों और अन्य के बीच पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।’’
भाषा अमित सुभाष
सुभाष

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