Ganga Mai ki Betiyan 8 June 2026/Image Credit: ScreenGrab / Youtube / @TellyChakkar
Ganga Mai ki Betiyan: ‘ZEE TV’ के सबसे पसंदीदा शो ‘गंगा माई की बेटियाँ‘ की कहानी में, सिद्धू के दिल पर होगा एक भावात्मक वार.. क्योंकि स्नेहा की एक शिकायत उसके होश उड़ा देती है।
दुर्गावती जब पुलिस स्टेशन पहुँचती है और सिद्धू को पुलिस के द्वारा बेरहमी से पीटते हुए देख, पूरी तरह से हिल जाती है। भले ही इस वक़्त सिद्धू के साथ उसके लाख मतभेद हों, किन्तु अपने बेटे को जेल की सलाखों के पीछे यूँ तड़पता हुआ देखना, एक माँ के बर्दाश्त से बाहर हो जाता है। वह तुरंत आगे बढ़कर पुलिस को रोकती है और सिद्धू की आँखों में आँसू देख उसे विश्वास दिलाती है कि वह उसे वहाँ ज्यादा देर तक रहने नहीं देगी, साथ ही वह उससे वादा करती है कि किसी भी कीमत पर वह उसे इस कालकोठरी से छुड़वाकर ही दम लेगी।
दूसरी ओर, गंगा को सिद्धू की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही उसके पैरों तले ज़मीन खिसक जाती है। वह घबराकर स्नेहा से कहती है कि दुर्गावती बड़ी मुश्किल से पंचायत की बैठक में शामिल होने के लिए तैयार हुई थी किन्तु अब सिद्धू की गिरफ्तारी के बाद, सब कुछ बदल सकता है और गंगा के दिल में ये खौफ बैठ जाता है कि अब स्थिति पूरी तरह से बेकाबू हो सकती है।
दुर्गावती के सामने स्नेहा खुलकर स्वीकार करती है कि उसने ही सिद्धू के खिलाफ शिकायत करके उसे जेल भिजवाया है। सिद्धू के द्वारा जबरदस्ती की हुई शादी और सच छिपाने के धोखे से अभी भी वह पूरी तरह से उभर नहीं पाई है उसका मानना है सिद्धू को उसके गुनाहों के सख़्त सज़ा मिलनी ही चाहिए।
असली ट्विस्ट तो पुलिस स्टेशन में आता है जब दुर्गावती इंस्पेक्टर से सिद्धू को तुरंत रिहा करने की मांग करती है लेकिन इंस्पेक्टर उसकी माँग ठुकरा देता है और उसे याद दिलाता है कि गंभीर मामले में कानूनी प्रक्रिया को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उस घटना के दौरान, शायद पहली बार, दुर्गावती को यह एहसास होता है कि उसका प्रभाव अकेले सिद्धू को जेल से बाहर निकालने के लिए काफी नहीं है।
मुश्किल हालातों का फायदा उठाते हुए, तेज आगे बढ़कर दुर्गावती से कहता है कि सिद्धू को ज़मानत दिलाना आसान नहीं होगा, साथ ही वह एक आसान सा रास्ता बताते हुए कहता है कि यदि स्नेहा अपनी शिकायत वापस ले ले, तो सिद्धू जल्दी छूट सकता है। उसके सुझाव से बाज़ी पूरी तरह से पलट जाती है और दुर्गावती की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ जाती हैं।
अब यह देखना वाक़ेय बहुत दिलचस्प होगा कि क्या दुर्गावती अपने अहंकार को भूलाकर, स्नेहा के आगे हाथ फैलाएगी? या स्नेहा के लिए उसकी नफरत, इस कदर हावी हो जाएगी कि वह उस औरत से मदद मांगने से इनकार कर देगी, जो उसके बेटे की आखरी उम्मीद है?