Draupadi Murmu: द्रौपदी मुर्मू बनीं देश की 15वीं राष्ट्रपति, IBC pedia में पढ़िए उनका सियासी सफर

presidential election 2022: द्रौपदी मुर्मू देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति बन गई हैं। वह देश की 15वीं राष्ट्रपति बन गई हैं। इससे पहले वह ....

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  • Publish Date - July 21, 2022 / 08:04 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:41 PM IST

  • ललित सिंह राजपूत

presidential election 2022: एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति बन गई हैं। वह देश की 15वीं राष्ट्रपति निर्वाचित हुई हैं। इससे पहले वह देश की पहली महिला राज्यपाल रहा चुकी हैं। तीसरे राउंड की गिनती में ही उन्होंने राष्ट्रपति बनने के लिए जरूरी 50 फीसदी वोट पा लिए थे। उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को बड़े अंतर से हराया है। कुल तीनों राउंड की बात करें तो कुल वोट 3 हजार 219 थे। इनकी वैल्यू 8,38,839 थी। इसमें से द्रौपदी मुर्मू को 2 हजार 161 वोट (वैल्यू 5,77,777) मिले । वहीं यशवंत सिन्हा को 1 हजार 58 वोट (वैल्यू 2,61,062) मिले।

द्रौपदी मुर्मू से मिलने पहुंचे पीएम मोदी

द्रौपदी मुर्मू की जीत पर पीएम मोदी दिल्ली में उनके घर पहुंचे। उनके साथ बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी मौजूद रहे। दोनों ने मुर्मू को राष्ट्रपति चुनाव जीतने पर बधाई दी।  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी द्रौपदी मुर्मू को बधाई दी। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रपति चुनाव में प्रभावी जीत दर्ज करने के लिए श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी को बधाई। वे गांव, गरीब, वंचितों के साथ-साथ झुग्गी-झोपड़ियों में भी लोक कल्याण के लिए सक्रिय रहीं हैं। आज वे उनके बीच से निकल कर सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंची है। यह भारतीय लोकतंत्र की ताकत का प्रमाण है।

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विधानसभा चुनावों को देखते हुए आदिवासी समुदाय पर बीजेपी का फोकस

राजनीति के जानकारों का कहना है कि गुजरात, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए आदिवासी समुदाय पर भाजपा का फोकस है। पार्टी को लगता है कि आदिवासी वोट उसकी योजनाओं की कुंजी है। अभी तक देश में कोई आदिवासी राष्ट्रपति नहीं था। इस लिहाज से मुर्मू आदिवासी और महिला, दोनों वर्ग में फिट बैठती हैं। भाजपा कह सकती है कि इसने समुदाय को सशक्त बनाया है और इसका उसे स्पष्टतौर पर चुनावी लाभ मिल सकता है।

देश की पहली आदिवासी महिला राज्यपाल रहीं हैं मुर्मू

Draupadi Murmu : ओडिशा के आदिवासी जिले मयूरभंज के रायरंगपुर गांव में जन्मी द्रौपदी मुर्मू झारखंड की प्रथम महिला राज्यपाल होने का गौरव प्राप्त कर चुकी हैं। वह झारखंड की प्रथम महिला राज्यपाल के रूप में भी अपना नाम दर्ज करा चुकी हैं। द्रोपदी 18 मई 2015 से 12 जुलाई 2021 तक झारखंड के राज्यपाल पद पर रहीं हैं। वह झारखंड की नौवीं राज्यपाल रहीं। द्रौपदी मुर्मू देश की पहली आदिवासी महिला राज्यपाल हैं। अपने बेहतर फैसलों को लेकर उन्हें जाना जाता है।

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अंग्रेजी में ली थी शपथ

झारखंड राजभवन के बिरसा मंडप में आयोजित एक समारोह में राज्य के मुख्य न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने उनको पद की शपथ दिलाई थी। तब देश की पहली आदिवासी महिला राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने अंग्रेजी में शपथ ली थी। उन्होंने तब के राज्यपाल डॉ. सैयद अहमद की जगह ली थी, जिन्हें बाद में मणिपुर का राज्यपाल बनाया गया था।

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ऐसा रहा सियासी सफर

Draupadi Murmu: द्रौपदी मुर्मू साल 2000 से 2004 तक ओडिशा विधानसभा में रायरंगपुर से विधायक रहीं। वह पहली उड़िया नेता हैंं, जिन्हें किसी भारतीय राज्य की राज्यपाल बनाया गया । वह बीजेपी और बीजू जनता दल की गठबन्धन सरकार में 6 मार्च 2000 से 6 अगस्त 2002 तक वाणिज्य और परिवहन के लिए स्वतंत्र प्रभार की राज्य मंत्री रहीं। 6 अगस्त 2002 से  16 मई 2004 तक मत्स्य पालन और पशु संसाधन विकास राज्य मंत्री भी रह चुकी हैं। द्रौपदी मुर्मू ओडिशा में दो बार रायरंगपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रही हैं।

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‘मुर्मू को गवर्नर बनाना केन्द्र सरकार का बेहतर कदम’

झारखंड के प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष और कोडरमा से सांसद रवीन्द्र राय ने कहा था कि- “बीजेपी के नेतृत्व में बनी एनडीए सरकार ने देश के आदिवासी समुदाय को उनका हक देने के प्रयास के तहत एक आदिवासी महिला नेता को राज्यपाल बनाया है। अब अगर उन्हें राष्ट्रपति बनाया जाता है तो इससे पूरे देश में ही नहीं, विश्व में भी अच्छा संदेश जाएगा”।

 

राज्य के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन ने भी द्रौपदी मुर्मू को राज्यपाल बनाए जाने का स्वागत किया था और कहा कि “यह केन्द्र सरकार का अच्छा कदम है”। भाजपा को झामुमो के समर्थन के साथ ही बीजद और आदिवासी होने के नाते अन्य दलों के समर्थन की भी उम्मीद है।