अदालत ने एक समिति से हटाए गए चिकित्सकों को दूसरी समिति में शामिल करने को चौंकाने वाला करार दिया |

अदालत ने एक समिति से हटाए गए चिकित्सकों को दूसरी समिति में शामिल करने को चौंकाने वाला करार दिया

अदालत ने एक समिति से हटाए गए चिकित्सकों को दूसरी समिति में शामिल करने को चौंकाने वाला करार दिया

: , August 19, 2022 / 10:23 PM IST

जबलपुर, 19 अगस्त (भाषा) मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने जबलपुर के अस्पतालों में अग्निशमन सुविधाओं का निरीक्षण करने वाली समिति में उन तीन डॉक्टर को नामित करने को ‘‘चौंकाने’’ वाला करार दिया, जिन्हें उसी दिन अन्य समिति से हटाया गया था।

जबलपुर के दमोह नाका स्थित ‘न्यू लाइफ मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल’ में एक अगस्त को आग लग गई थी, जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई थी और 18 लोग घायल हुए थे।

मध्य प्रदेश सरकार ने एक जनहित याचिका के जवाब में अदालत को बताया कि एक अगस्त को आग लगने की घटना के मामले में डॉ एल.एन. पटेल, डॉ निषेध चौधरी और डॉ कमलेश वर्मा द्वारा प्रस्तुत निरीक्षण रिपोर्ट उचित नहीं थी और अगले दिन उन्हें समिति से हटा दिया गया था।

याचिका में अधिकारियों को नए नर्सिंग होम और अस्पतालों को अनिवार्य सुरक्षा और अग्निशमन मानदंड पूरे किए बिना पंजीकृत करने से रोकने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

याचिकाकर्ता और अधिवक्ता विशाल बघेल ने अदालत को बताया कि एक अगस्त को लगी आग की घटना के मद्देनजर जबलपुर के सभी अस्पतालों का निरीक्षण करने के लिए एक नई समिति में उक्त तीन डॉक्टर को दो अगस्त को शामिल किया गया था।

अदालत ने देखा कि जबलपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने तीन डॉक्टरों को निलंबित करने का आदेश दिया था, लेकिन राज्य सरकार के जवाब के हिस्से के रूप में प्रस्तुत एक अन्य दस्तावेज में कहा गया था कि ये तीनों डॉक्टर दुर्भाग्यपूर्ण घटना की जांच के लिए गठित समिति में थे।

मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमथ और न्यायमूर्ति डीके पालीवाल की खंडपीठ ने गुरुवार को कहा, ‘जिस तरह से कार्यवाही की गई है, यह काफी चौंकाने वाला है। जब निलंबन के आदेश प्रस्तावित किए जाते हैं, उसी दिन उसी व्यक्ति को एक (अन्य) समिति का सदस्य बनाया जाता है ताकि वह उसी मुद्दे की जांच कर सके जिसके लिए उन्हें निलंबित किया जा रहा है।

पीठ ने राज्य के उप महाधिवक्ता से इस मुद्दे पर हलफनामा दाखिल करने को कहा।

सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि तीनों डॉक्टरों को निलंबन का नोटिस जारी कर दिया गया है और वह सुनवाई की अगली तारीख को अदालत को बताएंगे कि क्या हुआ है।

पीठ जबलपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को चार अनिवार्य मानदंडों को पूरा नहीं करने वाले नए नर्सिंग होम या अस्पतालों को अनुमति देने से रोकने और मौजूदा सुविधाओं के इन मानदंडों से संबंधित दस्तावेजों की फिर से जांच करने का स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश देने के लिए दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

भाषा शफीक नरेश

नरेश

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