सभी धार्मिक समूहों की सहमति के बिना मप्र में समान नागरिक संहिता लागू न की जाए: दिग्विजय सिंह

सभी धार्मिक समूहों की सहमति के बिना मप्र में समान नागरिक संहिता लागू न की जाए: दिग्विजय सिंह

सभी धार्मिक समूहों की सहमति के बिना मप्र में समान नागरिक संहिता लागू न की जाए: दिग्विजय सिंह
Modified Date: June 29, 2026 / 11:10 pm IST
Published Date: June 29, 2026 11:10 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

बड़वानी (मध्यप्रदेश), 29 जून (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सोमवार को कहा कि मध्यप्रदेश सरकार को सभी धार्मिक समूहों और समुदायों की सहमति के बिना समान नागरिक संहिता लागू नहीं करनी चाहिए।

उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर में दान के कथित गबन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की।

राज्य सरकार विधानसभा के 20 जुलाई से शुरू होने जा रहे मॉनसून सत्र में समान नागरिक संहिता विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है।

अधिकारियों ने बताया कि समान नागरिक संहिता लागू करने के विषय में राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की है।

अधिकारियों के मुताबिक समिति ने राज्य के लिए समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया के तहत राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और धार्मिक नेताओं सहित विभिन्न हितधारकों से मौखिक और लिखित सुझाव लिए हैं।

सिंह ने संवाददाताओं से कहा,‘‘कांग्रेस का स्पष्ट मत है कि सभी धर्मों, समुदायों और सामाजिक संगठनों से व्यापक संवाद एवं सहमति के बिना राज्य में समान नागरिक संहिता लागू नहीं की जानी चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि भारत की विविधता और संविधान की मूल भावना को ध्यान में रखते हुए संवाद एवं सहमति का मार्ग ही सर्वोत्तम है।

अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान के गबन के आरोपों पर सिंह ने कहा कि यदि भ्रष्टाचार हुआ है, तो केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई करके मामले को समाप्त नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के जिन पदाधिकारियों के नाम इस मामले में सार्वजनिक चर्चा में आए हैं, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने स्वयं भी भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया था और ‘यदि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ हुआ है, तो दोषियों को कानून के अनुसार दंड मिलना चाहिए।’

उन्होंने बताया कि वह विधि विशेषज्ञों से परामर्श कर रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर इस मामले में जनहित याचिका दायर करेंगे।

मध्यप्रदेश में कथित भ्रष्टाचार, अवैध खनन, भूमि उपयोग में बदलाव और धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता सहित विभिन्न मुद्दों पर मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधते हुए सिंह ने कहा,‘‘लोकतंत्र में सरकार और मुख्यमंत्री जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं तथा उन्हें ऐसे मामलों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव करने से उसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है और यदि सत्ता का इस्तेमाल निजी लाभ के लिए किया जाता है, तो यह एक गंभीर मामला है।

सिंह ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री से जुड़े लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं जिस पर उन्हें खुद स्पष्टीकरण देना चाहिए।

उज्जैन में एक ट्रस्ट को बेशकीमती जमीन आवंटन को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के हालिया आरोपों का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि उन्होंने उपलब्ध दस्तावेजों की व्यक्तिगत रूप से जांच की है।

सिंह ने कहा कि जांच के दौरान यह बात सामने आई कि जिस ट्रस्ट को जमीन आवंटित की गई थी, वह असल में एक सरकारी ट्रस्ट है।

उन्होंने कहा,‘‘ लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि राज्य में भ्रष्टाचार के अन्य गंभीर मामलों की अनदेखी की जा सकती है।’’

सिंह ने आरोप लगाया कि बड़वानी जिले के बड़दा गांव में अवैध रेत खनन को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।

कांग्रेस नेता के मुताबिक स्थानीय निवासियों ने उन्हें बताया है कि प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में अवैध गतिविधियां चल रही हैं, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

भाषा हर्ष राजकुमार

राजकुमार


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