व्यापमं घोटाला, 2013 में आरक्षक भर्ती परीक्षा में अनियमितता के आरोप में पांच को सात साल कारावास |

व्यापमं घोटाला, 2013 में आरक्षक भर्ती परीक्षा में अनियमितता के आरोप में पांच को सात साल कारावास

व्यापमं घोटाला, 2013 में आरक्षक भर्ती परीक्षा में अनियमितता के आरोप में पांच को सात साल कारावास

: , November 29, 2022 / 08:20 PM IST

भोपाल, 30 सितंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के भोपाल में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने व्यापमं घोटाले के सिलसिले में पांच लोगों को सात-सात साल के करोठ कारावास की सजा सुनाई है।

विशेष अदालत के न्यायाधीश नीतिराज सिंह सिसोदिया ने बृहस्पतिवार को कमल किशोर, अमर सिंह, नागेंद्र सिंह, सुरेश सिंह और रवि कुमार राजपूत को मध्यप्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित 2013 की पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में धांधली करने के मामले में दोषी करार देते हुए सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

सरकारी वकील मनुजी उपाध्याय ने एक बयान में कहा कि अदालत ने प्रत्येक मुजरिम के खिलाफ दस हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान 220 दस्तावेजों और वस्तुओं के साथ 32 गवाहों की जांच की।

उन्होंने बताया कि कमल, अमर, नागेद्र और सुरेश ने सात अप्रैल 2013 को मप्र पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा लिखने के लिए लोगों को काम पर रखा था। रवि राजपूत ने नागेंद्र के लिए यह भर्ती परीक्षा लिखी थी।

सीबीआई के विशेष अभियोजक सतीश दिनकर ने बताया कि आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 419 (प्रतिरूपण) 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान सुरक्षा का हस्तांतरण) 468 (जाली दस्तावेज) और 471 (जाली दस्तावेजों का वास्तविक रूप में उपयोग) के साथ-साथ मध्य प्रदेश परीक्षा मान्यता अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया गया।

व्यापमं घोटाला 2013 में तब सुर्खियों में आया था जब यह खुलासा हुआ था कि व्यापमं द्वारा आयोजित कई परीक्षाओं में पैसे के एवज में धांधली की गई। 2015 में उच्चतम न्यायालय ने व्यापमं घोटाले की जांच सीबीआई को दे दी थी।

व्यापमं का नाम कुख्यात होने से इसका नाम बदलकर पहले एमपी प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड और बाद में फिर इस साल फरवरी में मप्र कर्मचारी चयन आयोग कर दिया गया।

भाषा दिमो रंजन

रंजन

 

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