बैंक खातों से करोड़ों रुपये ‘‘गायब’’, सरकार ने दिया स्पष्टीकरण |

बैंक खातों से करोड़ों रुपये ‘‘गायब’’, सरकार ने दिया स्पष्टीकरण

बैंक खातों से करोड़ों रुपये ‘‘गायब’’, सरकार ने दिया स्पष्टीकरण

: , June 30, 2022 / 12:20 AM IST

अमरावती, 29 जून (भाषा) आंध्र प्रदेश सरकार के 90,000 से अधिक कर्मचारियों के बैंक खातों से सैकड़ों करोड़ रुपये कथित तौर पर ‘गायब’ हो गए और आरोप है कि पैसे सरकार ने वापस ले लिए हैं। हालांकि विशेष मुख्य सचिव (वित्त) एस एस रावत ने बुधवार को इस आरोप से इनकार किया।

आरोप है कि राशि कर्मचारियों के सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) खातों में जमा होने के बाद ‘अवैध रूप से निकाली गई।’’

जवाब में, राज्य सरकार ने कहा कि महंगाई भत्ता (डीए) बकाया राशि ‘गलती से’ कर्मचारियों के जीपीएफ खातों में ‘एक तकनीकी गड़बड़ी के कारण’ जमा की गई थी।

निदेशक ट्रेजरी एंड अकाउंट्स द्वारा दी गई प्रारंभिक जानकारी का हवाला देते हुए, रावत ने एक बयान में कहा कि बिल मंजूर नहीं होने के बावजूद डीए बकाया जमा हो गया। रावत ने कहा, ‘‘ट्रेजरी नियमों के अनुसार, हर साल 31 मार्च तक लंबित रहने वाले सभी बिल संबंधित कोषागार अधिकारी द्वारा रद्द कर दिए जाएंगे। भुगतान न हुए डीए बकाया बिल रद्द होने के कारण, समायोजन राशि जो गलती से जीपीएफ खातों में जमा हो गई थी, उसे भी सिस्टम सॉफ्टवेयर द्वारा वापस ले लिया गया।’’

विशेष मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार तकनीकी खराबी को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।

इससे पहले सरकारी कर्मचारी संघों ने यहां राज्य वित्त विभाग के अधिकारियों के साथ मामला उठाया, लेकिन बात स्पष्ट नहीं हो पाई। संघों ने ‘अवैध निकासी’ को न केवल असंवैधानिक बल्कि आपराधिक भी करार दिया है।

आंध्र प्रदेश संयुक्त कार्य समिति और आंध्र प्रदेश संयुक्त कार्य समिति अमरावती के नेताओं ने आज यहां विशेष मुख्य सचिव (वित्त) एस एस रावत से मुलाकात की और स्पष्टीकरण मांगा।

आंध्र प्रदेश अराजपत्रित अधिकारी संघ के अध्यक्ष बंदी श्रीनिवास राव ने रावत से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘विशेष मुख्य सचिव का दावा है कि सरकार ने पैसे नहीं निकाले। उनका कहना है कि तकनीकी त्रुटि के कारण ऐसा हो सकता है और उन्होंने इसकी जांच करने का वादा किया है।’’

यह मामला उच्च न्यायालय में उठा, जिसने सरकार को दो सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

आंध्र प्रदेश सरकार कर्मचारी संघ के अध्यक्ष के आर सूर्यनारायण के अनुसार, कर्मचारी संघों ने इस मुद्दे पर प्रधान महालेखाकार को भी अर्जी दी क्योंकि वह जीपीएफ खातों के संरक्षक हैं। सूर्यनारायण, जिनके व्यक्तिगत खाते से ही 83,000 रुपये की राशि गायब हो गई, ने सवाल उठाया कि ‘सरकार बिना सहमति के किसी के खाते से पैसे कैसे निकाल सकती है।’’

भाषा अमित नेत्रपाल

नेत्रपाल

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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