महाराष्ट्र में सेवा से मुक्त हो चुके श्वान अब पुलिस बल के साथ ही रहेंगे
महाराष्ट्र में सेवा से मुक्त हो चुके श्वान अब पुलिस बल के साथ ही रहेंगे
मुंबई, 23 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र में पुलिस सेवा से मुक्त श्वानों को अब किसी अन्य घर में गोद दिए जाने के बजाय जीवनभर सुरक्षा बल (पुलिस) के साथ ही रहने की अनुमति दी जाएगी। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार यह फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के बाद लिया गया है।
एक विज्ञप्ति में बताया गया कि यह फैसला गृह विभाग की एक रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें 10 साल की सेवा पूरी करने के बाद पुलिस श्वानों को होने वाली कठिनाइयों का उल्लेख किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ श्वान उन प्रशिक्षकों से अलग किए जाने के बाद खाना तक छोड़ देते थे जिनके साथ उनका गहरा लगाव हो गया था।
विज्ञप्ति में कहा गया कि प्रस्तावित योजना के तहत पुलिस विभाग सेवा से मुक्त हो चुके इन श्वानों के भोजन, चिकित्सा देखभाल और रखरखाव की जिम्मेदारी उठाएगा और जीवनभर तक उनकी देखभाल करेगा।
अधिकारियों ने बताया कि ये श्वान पुलिस बल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। वे विस्फोटक और नशीले पदार्थों का पता लगाने, अपराधियों को खोजने, खोज और बचाव अभियानों को अंजाम देने तथा दुर्घटना व आपदा स्थलों पर मलबे के नीचे दबे लोगों का पता लगाने में मदद करते हैं।
पुलिस का एक श्वान आमतौर पर छह से नौ सप्ताह की उम्र में बल में शामिल होता है और विभिन्न कर्तव्यों के लिए तैनात किए जाने से पहले व्यापक प्रशिक्षण से गुजरता है।
मौजूदा व्यवस्था में 10 साल की सेवा पूरी करने के बाद इन श्वानों को सेवा मुक्त कर दिया जाता है और गोद लेने वाले उपयुक्त लोगों के पास भेज दिया जाता है।
हालांकि, गृह विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ श्वानों के लिए अपने पुलिस प्रशिक्षक से अलग होने के बाद नए माहौल में ढलना मुश्किल हो जाता है।
विज्ञप्ति के अनुसार, कुछ मामलों में सेवा मुक्त श्वानों ने उन पुलिसकर्मियों से अलग होने के बाद खाना बंद कर दिया था, जिनके साथ सेवा के वर्षों के दौरान उनका गहरा जुड़ाव हो गया था।
फडणवीस ने रिपोर्ट मिलने के बाद गृह विभाग को पुलिस सेवा से मुक्त श्वानों को पुलिस बल के साथ ही रहने देने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘पुलिस बल को 10 साल की समर्पित और वफादार सेवा देने के बाद यह सही नहीं है कि ऐसे श्वानों को कष्ट सहना पड़े। भले ही वे जानवर हैं, लेकिन हमें उनकी देखभाल करनी चाहिए।’’
विज्ञप्ति में कहा गया है कि 10 साल की सेवा पूरी करने के बाद पुलिस श्वानों का शेष जीवनकाल आमतौर पर केवल एक से डेढ़ साल का ही होता है। नयी व्यवस्था से वे अपने प्रशिक्षकों और पुलिस बल के साथ बने रह सकेंगे।
भाषा खारी रंजन
रंजन

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