एचडीएफसी बैंक को बयान देने से रोकने की लीलावती ट्रस्ट की याचिका खारिज, पांच लाख रु. का जुर्माना लगा
एचडीएफसी बैंक को बयान देने से रोकने की लीलावती ट्रस्ट की याचिका खारिज, पांच लाख रु. का जुर्माना लगा
मुंबई, नौ जून (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को लीलावती अस्पताल चलाने वाले चिकित्सा न्यास की वह अंतरिम याचिका खारिज कर दी, जिसमें एचडीएफसी बैंक, उसके प्रबंध निदेशक और सीईओ शशिधर जगदीशन और अन्य लोगों को न्यास और उसके सदस्यों के खिलाफ कोई भी मानहानिपूर्ण टिप्पणी करने से रोकने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
‘लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट’ ने बैंक से 1,000 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग करते हुए मानहानि के मुकदमे में एक अंतरिम अर्जी दायर की थी। न्यास का आरोप था कि बैंक और उसके वरिष्ठ अधिकारियों ने मीडिया एवं सोशल मीडिया मंच पर ऐसे बयान जारी किए थे, जो मानहानिकारक थे और जिनसे न्यास की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा था।
न्यायमूर्ति सोमशेखर सुंदरेशन की पीठ ने हालांकि अर्जी को खारिज करते हुए यह कहा कि बयान मानहानि करने वाले नहीं थे और असल में तथ्यों के लिहाज से सही थे।
अदालत ने न्यास पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, जो एचडीएफसी बैंक को देना होगा। अदालत ने यह भी कहा कि यह अर्ज़ी, वसूली की कार्यवाही को रोकने के लिए न्यास की तरफ से शुरू की गई कार्यवाहियों की लंबी कड़ी में एक और कोशिश भर थी।
पीठ ने कहा कि एचडीएफसी बैंक का यह बयान कि न्यास और उसके न्यासी प्रशांत मेहता पर बैंक का पैसा बकाया है, तथ्यों के आधार पर सही था और इसलिए यह सच बोलने के दायरे में आता है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि ये बयान सिर्फ़ इसलिए देने पड़े, क्योंकि एचडीएफसी और उसके वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मीडिया में लगातार लेख प्रकाशित करने का अभियान चलाया जा रहा था।
शहर के बांद्रा इलाके में लीलावती अस्पताल चलाने वाले लीलावती कीर्तिलाल मेहता ट्रस्ट ने एचडीएफसी बैंक लिमिटेड और उसके अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। न्यास का आरोप था कि बैंक ने अपने सोशल मीडिया मंच पर न्यास और उसके सदस्यों के बारे में मानहानि करने वाली बातें पोस्ट की थीं।
भाषा प्रशांत सुरेश
सुरेश

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