हमारा विद्रोह ‘विश्वासघात’ नहीं था, हम बाल ठाकरे की विरासत के सच्चे उत्तराधिकारी : शिंदे |

हमारा विद्रोह ‘विश्वासघात’ नहीं था, हम बाल ठाकरे की विरासत के सच्चे उत्तराधिकारी : शिंदे

हमारा विद्रोह ‘विश्वासघात’ नहीं था, हम बाल ठाकरे की विरासत के सच्चे उत्तराधिकारी : शिंदे

: , October 6, 2022 / 12:38 AM IST

मुंबई, पांच अक्टूबर (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बुधवार को कहा कि उनका विद्रोह ‘‘विश्वासघात’’ कतई नहीं था, बल्कि एक ‘‘बगावत’’ थी। उन्होंने शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से पार्टी संस्थापक बाल ठाकरे के आदर्शों के खिलाफ जाने और कांग्रेस एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के साथ गठबंधन करने के लिए उनके (बाल ठाकरे के) स्मारक पर घुटने टेकने और माफी मांगने को कहा।

शिंदे ने दशहरे के अवसर पर बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स के एमएमआरडीए मैदान में एक महारैली को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य में मतदाताओं ने 2019 के विधानसभा चुनावों में शिवसेना और भाजपा को चुना, लेकिन उद्धव ठाकरे ने महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार के गठन के लिए कांग्रेस और राकांपा से हाथ मिलाकर राज्य की जनता को ‘‘धोखा’’ दिया।

उन्होंने कहा कि उनकी दशहरा रैली में भारी भीड़ यह दिखाने के लिए पर्याप्त है कि बाल ठाकरे की विरासत के सच्चे उत्तराधिकारी कौन हैं।

पार्टी के बागी धड़े के मुखिया शिंदे ने पूर्व मुख्यमंत्री ठाकरे की आलोचना करते हुए कहा कि शिवसेना कोई ‘‘प्राइवेट लिमिटेड कंपनी’’ नहीं है और 56 साल पुराने संगठन को शिवसेना के आम कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत से बनाया गया है।

मुख्यमंत्री ने जून में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ अपने विद्रोह का बचाव किया। उस बगावत के कारण एमवीए सरकार गिर गयी थी। उन्होंने कहा, ‘‘हमने यह कदम (विद्रोह) शिवसेना को बचाने, बालासाहेब, हिंदुत्व के सिद्धांतों को बनाए रखने और महाराष्ट्र की बेहतरी के लिए उठाया था और हमने इसे सार्वजनिक रूप से किया।’’

उन्होंने कहा कि उन्हें इस फैसले के लिए जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। मुख्यमंत्री ने उद्धव ठाकरे को मुंबई में शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के स्मारक पर घुटने टेकने और उनके आदर्शों के खिलाफ जाने तथा एक समय के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों कांग्रेस और राकांपा के साथ गठबंधन करने के लिए माफी मांगने को कहा।

शिंदे ने कहा कि उनका विद्रोह ‘विश्वासघात’ नहीं था, बल्कि एक गदर था।

शिवसेना के ठाकरे गुट ने अक्सर विद्रोहियों को ‘गद्दार’ कहकर निशाना बनाया है।

उन्होंने ठाकरे के बेटों-आदित्य और तेजस ठाकरे के संदर्भ में कहा कि ठाकरे कभी ‘‘हम दो हमारे दो’’ से आगे नहीं बढ़े। शिंदे ने कहा कि जब उद्धव ठाकरे नवंबर 2019 में मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने अपने बेटे आदित्य को भी कैबिनेट सदस्य बनाया।

शिंदे की रैली में उद्धव ठाकरे के भाई जयदेव ठाकरे और उनसे अलग हो चुकी पत्नी स्मिता ठाकरे ने भाग लिया।

दिवंगत बाल ठाकरे के पोते निहार ठाकरे तथा शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे के लंबे समय तक निजी सहयोगी रहे चंपा सिंह थापा ने भी रैली में हिस्सा लिया।

भाषा सुरभि नेत्रपाल

नेत्रपाल

 

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