पांच महाद्वीपों के लोग चाहते हैं आरएसएस के स्वयंसेवक उनके देशों में प्रशिक्षण दें: भागवत
पांच महाद्वीपों के लोग चाहते हैं आरएसएस के स्वयंसेवक उनके देशों में प्रशिक्षण दें: भागवत
नागपुर, तीन जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को दावा किया कि ‘‘पांच महाद्वीपों’’ से लोग संघ का दौरा कर चुके हैं और उन्होंने पूछा है कि क्या संगठन के स्वयंसेवक संबंधित देशों में उनके लोगों को प्रशिक्षण देने में मदद कर सकते हैं।
भागवत ने यहां कहा, ‘‘समय- समय पर विदेशों से लोग आरएसएस के कार्य को देखने आते हैं। पांच महाद्वीपों के लोग यहां आ चुके हैं और उन्होंने पूछा है कि क्या आरएसएस के लोग उनके समाज में स्वयंसेवक तैयार करने के लिए उनके लोगों को प्रशिक्षण देंगे। वे जब भी यहां आते हैं, यही प्रश्न पूछते हैं।’’
वह नागपुर में यूट्यूब वीडियो ‘‘डॉ. हेडगेवार: आधुनिक युग के शालिवाहन’’ के सार्वजनिक प्रसारण के मौके पर आयोजित एक सभा को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम के दौरान भागवत ने संघ के शताब्दी समारोह के तहत आरएसएस के प्रचारकों के जीवन पर आधारित 100 वीडियो भी जारी किए।
उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया का विश्वास है कि भारत उसे सही मार्ग दिखाएगा, लेकिन ऐसा तभी होगा जब भारत स्वयं उस मार्ग पर चले, शक्तिशाली बने और समृद्धि हासिल करे।’’
भागवत ने कहा कि ऐसा होने के लिए आरएसएस को अपने शताब्दी वर्ष के दौरान अपने कार्यों का और अधिक विस्तार करना होगा। उन्होंने कहा कि समाज में अब आरएसएस के प्रति स्वीकार्यता और सम्मान बढ़ रहा है जबकि अपने शुरुआती वर्षों में संघ को जिस उपेक्षा का सामना करना पड़ा था वह अब धीरे-धीरे समाप्त हो रही है।’’
उन्होंने कहा कि आरएसएस और उसके स्वयंसेवकों की सर्वोच्च प्राथमिकता ऐसे व्यक्तियों का निर्माण करना है जो समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सेवा करने में सक्षम हों।
उन्होंने कहा कि इसके संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार ने विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया था और यह माना था कि अलग-अलग प्रकार के सामाजिक कार्यों को निरंतर जारी रखने के लिए समर्पित व्यक्तियों की आवश्यकता होती है।
आरएसएस की ‘शाखा’ को संगठन की जीवन-पद्धति की एक ‘‘प्रयोगशाला’’ बताते हुए भागवत ने कहा कि स्वयंसेवक अनुकूल या प्रतिकूल, हर परिस्थिति में ‘‘आरएसएस के जीवन-मूल्यों के अनुसार जीवन जीना’’ सीखते हैं।
उन्होंने कहा कि आरएसएस समाज के सभी वर्गों को एकजुट करने का प्रयास करता है।
भागवत ने कहा कि हेडगेवार ने केवल उपदेश देने के बजाय अपने आचरण से उदाहरण प्रस्तुत किया और संगठन के प्रति समर्पण के बल पर अपने व्यवहार में भी परिवर्तन किया।
उन्होंने कहा कि ‘‘हिंदू राष्ट्र’’ का हिस्सा बनने वाले सभी लोगों को अपनी सामूहिक शक्ति को एकजुट करना चाहिए और देश के ‘‘धर्म’’ की रक्षा करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि ‘‘धर्म’’ की रक्षा केवल उसका पालन करके ही की जा सकती है।
भाषा
देवेंद्र नरेश
नरेश

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