सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी, पत्रकार ने रुश्दी की किताब के खिलाफ मुंबई में हुए प्रदर्शन को याद किया |

सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी, पत्रकार ने रुश्दी की किताब के खिलाफ मुंबई में हुए प्रदर्शन को याद किया

सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी, पत्रकार ने रुश्दी की किताब के खिलाफ मुंबई में हुए प्रदर्शन को याद किया

: , August 13, 2022 / 10:25 PM IST

मुंबई, 13 अगस्त (भाषा) मुंबई में जन्मे ब्रिटिश-अमेरिकी उपन्यासकार सलमान रुश्दी पर न्यूयार्क में हुए हमले ने दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। इस बीच, एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी एवं एक पत्रकार ने रुश्दी के खिलाफ मुंबई में हुए एक विरोध-प्रदर्शन को याद किया है।

दक्षिण मुंबई के क्रोफॉर्ड मार्केट के निकट 14 फरवरी, 1989 को प्रदर्शनकारियों पर की गई पुलिस फायरिंग में कम से कम 12 व्यक्तियों की मौत हो गयी थी।

रुश्दी के विवादित पुस्तक ‘द सैटेनिक वर्सेज’ के खिलाफ मुंबई पुलिस आयुक्त कार्यालय के निकट भीड़भाड़ इलाके में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इसे कवर करने वाले पत्रकारों में उर्दू पत्रकार सरफरोज़ आरज़ू भी शामिल थे।

सरफरोज़ ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उस दिन की फायरिंग की घटना मुंबई पुलिस के इतिहास की सबसे दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में से एक थी।

उस समय समाचार-पत्र ‘हिंदुस्तान’ में कार्यरत सरफरोज़ ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों का इरादा हिंसा करने का नहीं था और उस क्षेत्र में दुकानें और अन्य प्रतिष्ठान हमेशा की तरह खुले हुए थे।

उन्होंने बताया कि विरोध मार्च दोपहर करीब 12 बजे नागपाड़ा के मस्तान तालाब से शुरू हुआ और जे जे जंक्शन मार्ग से आजाद मैदान की ओर बढ़ा। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मोहम्मद अली मार्ग पर बम्बई मर्केंटाइल बैंक के निकट प्रदर्शनकारियों को रोक दिया था।

पत्रकार ने बताया कि पुलिस ने एक प्रतिनिधिमंडल को मांगों का ज्ञापन सौंपने की अनुमति दी थी और लोगों को वहां से हट जाने को कहा था। उन्होंने दावा किया कि करीब अपराह्न तीन बजे पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोलियां चलाई, जिसमें 12 व्यक्तियों की मौत हो गयी और 40 अन्य घायल हो गये।

हालांकि कुछ अन्य समकालीन मीडिया कर्मियों के अनुसार, भीड़ के बीच से पुलिस पर गोली चलाई गई थी, जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने फायरिंग शुरू की थी।

सरफराज़ ने कहा कि रुश्दी ने बाद के वर्षों में मुंबई की कई बार यात्राएं की थीं, लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं घटी।

महाराष्ट्र के पुलिस पुलिस महानिदेशक डी. शिवानंदन ने कहा कि रुश्दी की पुस्तक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए मुस्लिम समुदाय के हजारों लोग क्रोफॉर्ड मार्केट में इकट्ठा हुए थे, लेकिन न तो प्रदर्शनकारियों ने और न ही पुलिस ने पुस्तक पढ़ी थी।

उन्होंने कहा कि चूंकि भारत सरकार ने पहले ही उस पुस्तक पर प्रतिबंध लगा दिया था ऐसे में कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करने वाला यह प्रदर्शन टाला जा सकता था।

भाषा सुरेश सुभाष

सुभाष

 

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