पंजाबियों के खून में बसी है बलिदान की भावना : भगवंत मान

पंजाबियों के खून में बसी है बलिदान की भावना : भगवंत मान

पंजाबियों के खून में बसी है बलिदान की भावना : भगवंत मान
Modified Date: January 24, 2026 / 08:33 pm IST
Published Date: January 24, 2026 8:33 pm IST

नांदेड़, 24 जनवरी (भाषा) पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को कहा कि त्याग और बलिदान की भावना पंजाबियों के खून में बसी है तथा वे देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने को तैयार हैं, चाहे वे कहीं भी जाएं।

मान ने महाराष्ट्र के नांदेड़ शहर में गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस पर आयोजित ‘हिंद दी चादर’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।

इस दो-दिवसीय ‘शहीदी समागम’ कार्यक्रम में लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।

मान ने कहा, ‘‘पंजाबियों ने देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने में हमेशा तत्परता दिखाई है। जब दुश्मन की तरफ से गोली आती है, तो वे सबसे पहले उसका सामना करते हैं, चाहे कारगिल हो, जैसलमेर हो, गंगानगर हो या बीकानेर। यह भावना हमें हमारे गुरुओं से मिली है और त्याग की भावना हमारे खून में बसी है।’’

उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों को प्राकृतिक आपदा आने पर मदद के लिए आगे आने के वास्ते भी जाना जाता है।

पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘चाहे तुर्की में भूकंप हो या श्रीलंका में बाढ़, रेड क्रॉस या बचाव दल बाद में पहुंचते हैं, लेकिन पंजाबी सबसे पहले अपने ‘लंगर’ (सामुदायिक रसोई) शुरू कर देते हैं। आप दुनिया में कहीं भी जाएं, आपको सबसे पहले लंगर सेवा मिलेगी।’’

उन्होंने सिख गुरुओं द्वारा किए गए बलिदानों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए संचार के विभिन्न माध्यमों का उपयोग करने का भी आह्वान किया।

मान ने कहा, ‘‘गुरु तेग बहादुर के प्राणों की आहुति के बाद, उनका पार्थिव शरीर लखी शाह बंजारा द्वारा ले जाया गया। मुगलों को इसका पता न चले, इसलिए बंजारा ने अपने ही घर में आग लगा दी और गुरु के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कर दिया। ये वे लोग हैं जिनके बारे में आने वाली पीढ़ियों को जानना चाहिए।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाबी धर्मनिरपेक्ष लोग हैं, जो हर समुदाय से प्यार करते हैं और पूरी दुनिया के कल्याण की कामना करते हैं।

उन्होंने कहा कि नांदेड़ को ‘पवित्र शहर’ का दर्जा दिया जाना चाहिए और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को सरकार के समक्ष यह मांग उठानी चाहिए। चव्हाण नांदेड़ से ही हैं।

भाषा रवि कांत सुरेश

सुरेश


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