रंजन गोगोई के खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न मामले में कोर्ट ने मीडिया को दिया संयम बरतने का आदेश, सीजेआई ने कहा -आरोप बेबुनियाद

 Edited By: Renu Nandi

Published on 20 Apr 2019 12:18 PM, Updated On 20 Apr 2019 12:18 PM

 दिल्ली। CJI की अगुवाई वाली पीठ ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज कर दिया है। साथ ही मीडिया से न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संयम दिखाने को कहा। इस विषय में सीजेआई का कहना है कि आरोप बेबुनियाद हैं।


चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों पर उनका का कहना है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता बहुत गंभीर खतरे में है और न्यायपालिका को अस्थिर करने के लिए एक "बड़ी साजिश" की जा रही है। उनका कहना है कि यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने वाली महिला के पीछे कुछ बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा,इस दौरान सीजेआई ने कहा कि क्या चीफ जस्टिस के 20 सालों के कार्यकाल का यह ईनाम है? 20 सालों की सेवा के बाद मेरे खाते में सिर्फ 6,80,000 रुपये है। कोई भी मेरा खाता चेक कर सकता है।


ज्ञात हो कि भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर एक पूर्व कनिष्ठ सहायक द्वारा यौन का मामला दर्ज करवाया गया है।पीड़िता ने इस विषय में ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई चल रही है।


इस विषय में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई का कहना है कि "न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। मुझ पर लगे आरोपों से मैं बहुत आहत हूं। सबसे मुख्य बात ये कि 4 बड़े मीडिया हाउस इस कहानी को विस्तार से प्रकाशित भी कर रहे हैं जिन्होंने मुझसे बात तक नहीं की है। बता दें कि सीजीआई की अगुवाई वाली पीठ ने आरोपों पर कोई आदेश पारित नहीं किया और मीडिया से न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संयम दिखाने को कहा। सीजेआई का कहना है कि आरोप बेबुनियाद हैं।

Web Title : A hearing of sexual harassment complaint made by a former junior assistant of Chief Justice of India Ranjan Gogoi

जरूर देखिये