Bastar dussehra : Dusshera is celebrated for 75 days here, | बस्तर दशहरा : यहां 75 दिन मनाया जाता है दशहरा लेकिन रावण दहन नहीं होता

बस्तर दशहरा : यहां 75 दिन मनाया जाता है दशहरा लेकिन रावण दहन नहीं होता

Reported By: Aman Verma, Edited By: Aman Verma

Published on 01 Oct 2017 06:50 PM, Updated On 01 Oct 2017 06:50 PM

 

बस्तर दशहरा। देशभर में विजयदशमी के दिन बुराई के स्वरूप रावण का पुतला दहन कर दशहरा मनाया जाता है। लेकिन देश में एक जगह ऐसी भी है जहां दशहर तो 75 दिन मनाया जाता है लेकिन रावण दहन नहीं किया जाता। यह अनूठा दशहरा छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल क्षेत्र बस्तर में मनाया है। बस्तर दशहरे के नाम से मशहूर इस दशहरे की ख्याति इतनी है की सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी सैलानी इस परंपरा को देखने आते है। मान्यता के अनुसार भागवान राम ने अपने वनवास के लगभग 10 साल दंडकारण्य में बिताए थे।

बस्तर दशहरा में आकर्षण का केंद्र है वजनी लकड़ी से बना विशाल रथ

छत्तीसगढ़ का बस्तर इलाका पुराने समय में दंडकारण्य के रूप में जाना जाता था। दंडकारण्य संस्कृत का शब्द है जिसका संधि विच्छेद होता दंड मतलब दंड देने वाल और कारण्य का अर्थ होता है वन मतलब दंड देने वाला वन। यहां का दशहरा राम के द्वारा लंका पर विजय के लिए नहीं मनाया जाता बल्कि दशहरें में बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की विशेष पूजा की जाती है। मां की पूजा के लिए भव्य रथ तैयार किया जाता है। इस रथ में मां के छत्र रखकर नवरात्रि के दौरान उन्हे भ्रमण के लिए निकाला जाता है। 8 पहियों वाले इस विजय रथ को खींचने का विशेषाधिकार किलेपाल परगना के माड़िया जनजाति का होता है। श्रावण के महीने में पड़ने वाली हरियाली अमावस्या से शुरू होने वाला यह त्योहार दशहरे के बाद तक चलता है और मुरिया दरबार की रस्म के साथ समाप्त होता है। यह त्योहार देश में सबसे लंबा चलने वाला त्योहार है।

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