भीमा कोरेगांव हिंसा केस, 3 आरोपी एक्टिविस्ट की जमानत याचिका खारिज, नजरबंदी अवधि बढ़ी

Reported By: Sanjeet Tripathi, Edited By: Sanjeet Tripathi

Published on 26 Oct 2018 04:40 PM, Updated On 26 Oct 2018 04:40 PM

नई दिल्ली। भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपी अरुण फेरेरा, वर्नोन गॉनसैल्विस और सुधा भारद्वाज की जमानत याचिका पुणे सेशन कोर्ट ने खारिज कर दी है। साथ ही, इन तीनों की हिरासत बढ़ा दी गई है। तीनों हाउस अरेस्ट हैं। इस मामले में कई जानेमाने सामाजिक कार्यकर्ताओं को आरोपित बनाया गया है।

महाराष्ट्र सरकार ने भीमा कोरेगांव केस में बांबे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। महाराष्ट्र सरकर ने हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसमें उच्च न्यायालय ने हिंसा की जांच अवधि बढ़ाने के निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया था। महाराष्ट्र सरकार की याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल व न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने की।

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राज्य सरकार की ओर से वकील निशांत कटनेश्वर ने दलील दी कि याचिका पर फौरन सुनवाई की जाए। वकील का कहना था कि अगर हाईकोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगाई गई तो निर्धारित अवधि में आरोप पत्र दाखिल नहीं होने से आरोपियों को वैधानिक जमानत मिल जाएगी। इससे पहले बुधवार को बांबे हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश को रद कर दिया था। निचली अदालत ने महाराष्ट्र पुलिस को हिंसा के इस मामले की जांच और आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने के लिए ज्यादा समय दिया था।

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गौरतलब है कि पुलिस ने इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र गडलिंग, प्रोफेसर शोमा सेन, सुधीर धावले, महेश राऊत और रोना विल्सन को जून में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया था। भीमा कोरेगांव हिंसा मामले के तहत ही पांच अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं वरवर राव, अरुण फेरेरा, वर्नोन गोनसाल्विस, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा को भी महाराष्ट्र पुलिस ने पिछले दिनों गिरफ्तार किया।

वेब डेस्क, IBC24

Web Title : Bhima Koregaon Case :

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