blog by saurabh tiwari | सुनो कुंठितों ! संपर्क टूटा है, हौसला नहीं ।

सुनो कुंठितों ! संपर्क टूटा है, हौसला नहीं ।

  Blog By: Saurabh Tiwari

इसरो के वैज्ञानिकों के साथ कल देश भी जागा। वैज्ञानिक मॉनीटर पर, तो देशवासी टीवी पर आंखें गड़ाए गौरवशाली ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने का इंतजार कर रहे थे।

चंद्रयान 2 की लैंडिंग से पहले के रोमांचकारी पलों को इसरो के वैज्ञानिकों के साथ ही देश ने भी महसूस किया। खतरे से भरे '15 मिनिट ऑफ टेरर' के चार चरणों में से दो चरणों के सफलतापूर्वक पार हो जाने पर इसरों में गूंजती तालियों में देश की भी ताली समाहित थी। चांद पर भारत के पदचिन्ह के रूप में अशोक चक्र की छाप देखने को देश बेताब था। सारे देश की बेचैन धड़कने वैज्ञानिकों के दिलों के साथ एकाकार हो चुकी थी।

चंद्रयान के साथ गया विक्रम लैंडर अपनी 3 लाख 84 हजार 402 किलोमीटर की यात्रा पूरी करके चांद की चौखट पर पहुंच चुका था। लेकिन अफसोस! महज 2.1 किलोमीटर के फासले से गृहप्रवेश ना हो सका।

विक्रम का इसरो से संपर्क क्या टूटा, देश का भी दिल टूट गया। चंद्रयान की पृथ्वी से चांद पर पहुंचने की 40 लाख 16 हजार 400 सेकंड की यात्रा पर 69 सेकंड पहले विराम लग गया। 69 सेकंड का ये लम्हा चंद्रयान 2 मिशन की 11 साल की मेहनत पर भारी पड़ गया।

मिशन की नाकामयाबी से इसरो के वैज्ञानिकों के मायूस चेहरे में देशवासियों के दर्द की भी लकीरें शामिल हैं। पूर्ण कामयाबी से चंद कदम दूर रह जाने की कसक से इसरो प्रमुख सिवन की डबडबाई आंखों में देशवासियों के आंसू भी शामिल है।

लेकिन विक्रम का केवल संपर्क टूटा है, वैज्ञानिकों का हौसला नहीं। केवल उड़ान पर विराम लगा है, उम्मीदों पर नहीं। असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करेंगे। क्या कमी रह गई थी, उसे देखेंगे और सुधार करेंगे। क्योंकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

लेकिन दुर्भाग्य से इस देश में एक ऐसा भी कमीना वर्ग है जो चंद्रयान 2 की नाकामी पर मन ही मन मुस्कुरा रहा है। कमीनेपन के रुझान मिलना शुरू भी हो गए हैं। सोशल मीडिया पर किए जाने वाले तंज में इनकी कुंठित मानसिकता को पढ़ा जा सकता है। टुच्चेपन की हद ये कि प्रधानमंत्री द्वारा इसरो प्रमुख को गले लगाकर ढाढस बंधाते भावुक पल तक का मजाक उड़ाया जा रहा है। कुछ वेबपोर्टलों में चंद्रयान मिशन के औचित्य पर ही सवाल खड़े करके सरकार को कठघरे में खड़ा करने का दौर शुरू हो चुका है।

वाकई हैरानी होती है आखिर कोई कैसे इतना कुंठित हो सकता है कि उसके लिए राष्ट्रीय गौरव संताप का और नाकामी संतोष का संदेश लेकर आती है। लुच्चों तुम पर लानत है। ऑक थू...।

सौरभ तिवारी, डिप्टी एडिटर,IBC24

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