छत्तीसगढ़ में बिछ गई चुनावी बिसात, योद्धा तैयार, जातिगत समीकरण पर ज्यादा भरोसा

Reported By: Shahnawaz Sadique, Edited By: Shahnawaz Sadique

Published on 03 Nov 2018 07:08 PM, Updated On 03 Nov 2018 07:08 PM

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक बिसात बिछ चुकी है। बीजेपी-कांग्रेस के सभी 90 सीटों पर प्रत्याशी तय हो चुके हैं। इसके साथ जोगी कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन के उम्मीदवार भी तय हो गए हैं। ऐसे में सियासी पारा चढ़ने लगा है। टिकट वितकण में सबसे खास बात यह रही कि सभी पार्टियों ने जातिगत समीकरण पर खास जोर दिया है। राजनीति में वोटरों को साधने के लिए समाज के लोगों को टिकट देने की परंपरा जैसी बन गई है। 90 विधानसभा सीटों में से 39 सीटें आरक्षित हैंजिसमें से 29 एसटी और 10 एससी वर्ग के लिए है। शेष 51 सीटें सामान्य वर्ग के लिए हैंहालांकि 51 सामान्य सीट में से 11 पर एससी वर्ग का प्रभाव माना जाता है। यही वजह है कि सामान्य सीट में दूसरे समाज को महत्व मिलता है। जातिगत समीकरण पर गौर करें तो प्रदेश की आधी से ज्यादा सीटों पर पिछड़ा वर्ग का दबदबा दिखता है। राज्य की करीब 47 फीसदी आबादी भी पिछड़ा वर्ग की है। इसलिए एक चौथाई विधायक इसी वर्ग से आते हैं। 

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राज्य में पिछले तीन चुनाव के आंकड़ों पर गौर करें तो एसटी और एससी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर भाजपा को बढ़त मिली है। राज्य बनने के बाद हुए पहले चुनाव 75 फीसदी एसटी सीटें भाजपा ने जीती थीं। इसके बाद साल 2008 के चुनाव  में 66 और 2013 के चुनाव में  36 प्रतिशत सीट पर जीत मिली थी। हालांकि कांग्रेस ने साल 2008 के मुकाबले सीटें ज्यादा लाईलेकिन 2003 के मुकाबले एक सीट कम है। तीनों चुनावों में 60 प्रतिशत एससी सीटें भाजपा ने जीतीं जबकि पिछले यानी 2013 के चुनाव में एससी सीटों पर कांग्रेस का सुपड़ा साफ हो गया था और केवल एक सीट पर जीत मिली थी। 90 फीसदी यानी सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार जीतकर आए थे। सामान्य सीटें जीतने में कांग्रेस भाजपा से औसतन फीसदी आगे है।    

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साल 2008 में परिसीमन के बाद ओबीसी वर्ग का दबदबा और बढ़ गया। 2003 में 19 ओबीसी विधायक सदन में पहुंचे। 2013 में यह संख्या बढ़कर 24 हो गई। 2008 के चुनाव में भाजपा को परिसीमन का फायदा हुआ। इस चुनाव में भाजपा के 13 ओबीसी विधायक चुने गएजबकि कांग्रेस के थे। हालांकि, 2013 में कांग्रेस ने इस गैप को पाटते हुए संख्या बराबर कर ली। सामान्य वर्ग की 51 सीटों में से 25 पर ओबीसी मतदाताओं का दबदबा है। प्रदेश में करीब 47 फीसदी वोटर ओबीसी हैं। 

यही कारण है कि चुनाव नजदीक आते ही और टिकट वितरण के समय सोशल इंजीनियरिंग की याद आती है और शुरू होता है समाज के ताने-बाने का गुणा-भाग है। 

छत्तीसगढ़ में एसटी-एससी से ज्यादा ओबीसी हैं। सबसे ज्यादा मतलब 47 फीसदी। इस आबादी में 95 से ज्यादा जातियां हैं। इन जातियों में 12 फीसदी साहू हैं। साहू बीजेपी का वोटबैंक माना जाता है और पार्टी सबसे ज्यादा साहू उम्मीदवार पर भरोसा जताती है। इस बार भी भाजपा ने साहू समाज के 14 लोगों को टिकट दी है। पिछड़ा वर्ग के दूसरे समाज क साधने के इरादे से संगठन में उन्हें महत्व दिया जाता है। इस समय दोनों पार्टियों में कुर्मी वोट बैंक को तवज्जो देने के लिहाज प्रदेश अध्यक्ष  कुर्मी समाज के हैं। 

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छत्तीसगढ़ में सोशल इंजीनियरिंग से परे कई सीट ऐसी हैंजहां पर चेहरा काम आता है। ऐसे में यहां जातिगत समीकरण मायने नहीं रखता है। ऐसी सीटों में से एक राजनांदगांव सीट हैजहां से मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह तीसरी बार राजनांदगांव से चुनाव लड़ेंगे। उनके सामने भी चेहरे को ही उतारा जाता है। कांग्रेस ने यहां से इस बार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला को खड़ा किया है। इसी तरह अंबिकापुर की सीट हैजहां पर नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव चेहरा हैं। उनके मुकाबले अनुराग सिंहदेव होंगें।  

  

 

सामाजिक समीकरण पर एक नजर ( सीटों के आधार पर) 

 

समाज       भाजपा      कांग्रेस

साहू           14             8

कुर्मी            9              7

ब्राह्मण         5              9

अग्रवाल       4               2

जैन             3              1

यादव          1              3

क्षत्रीय         6              4 

 

कांग्रेस ने दो मुस्लिम मो. अकबरबदरुद्दीन कुरैशी को उतारा जबकि भाजपा से कोई नहीं है। कांग्रेस ने तीन सिख कुलदीप जुनेजागुरुमुख सिंह होरा और आशीष छाबड़ा को टिकट दियालेकिन भाजपा ने इस समाज से किसी को भी टिकट नहीं दी है। 

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वोटरों की संख्या ( सामाजिक आधार पर) 

 

  • 32 फीसदी एसटी, 13 फीसदी एससी, 47 फीसदी ओबीसी  
  •  
  • 95 से अधिक जातियां ओबीसी में 
  •  
  • 12 प्रतिशत साहू समाज के मतदाता 
  •  
  • प्रतिशत यादव समाज के वोटर 
  •  
  • प्रतिशत मरारनिषाद व कुर्मी

 

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साल 2018 के भाजपा-कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची और 2013 के विजयी उम्मीदवार 

 

 सीट विजयी उम्मीदवार पार्टी  2013 हारने वाला प्रत्याशी भाजपा प्रत्याशी कांग्रेस  प्रत्याशी


 

 सीट 

विजयी उम्मीदवार

2013 हारने वाला प्रत्याशी

भाजपा प्रत्याशी

कांग्रेस  प्रत्याशी

भरतपुर-सोनहट (अ.ज.जा.)

चंपा देवी पावले  

गुलाब कमरो  INC

चंपादेवी पावले

गुलाब सिंह कमरो

मनेन्द्रगढ़

श्याम बिहारी जायसवाल 

गुलाब सिंह  INC

श्याम बिहारी जायसवाल

डॉ. विनय जायसवाल

बैकुंठपुर

भैया लाल राजवाड़े

बदंति तिवारी   INC

भैया लाल राजवाड़े

अम्बिका सिंह देव

प्रेमनगर

खेलसाय सिंह

रेणुका सिंह   BJP

विजय प्रताप सिंह

खेलसाय सिंह

भटगांव

पारस नाथ राजवाडे

रजनी त्रिपाठी BJP

रजनी त्रिपाठी

पारसनाथ राजवाड़े

प्रतापपुर (अ.ज.जा.) 

रामसेवक पैकरा

डॉ प्रेमसाय सिेह टेकाम   INC

राम सेवक पैकरा

प्रेमसाय सिंह टेकाम

रामानुजगंज (अ.ज.जा.)

बृहस्पत सिंह 

राम विचार नेताम  BJP

रामकिशुन सिंह

बृहस्पति सिंह

सामरी (अ.ज.जा.)

डॉ. प्रीतम राम

सिद्धनाथ पैकरा BJP

सिद्धनाथ पैकरा

चिंतामणी महाराज

लुण्ड्रा (अ.ज.जा.) 

 चिन्तामणी महाराज

विजयनाथ सिंह  BJP

विजयनाथ सिंह

डॉ. प्रीतम राम

अम्बिकापुर

टी.एस. सिंहदेव

अनुराग सिंहदेव BJP

अनुराग सिंहदेव

टीएस सिंह देव

सीतापुर (अ.ज.जा.)

 अमरजीत भगत

राजराम भगत  BJP

गोपाल राम भगत

अमरजीत भगत

जशपुर (अ.ज.जा.)

राजशरण भगत 

सरहुल राम भगत INC

गोविंद राम भगत

रामपुकार सिंह

कुनकुरी (अ.ज.जा.)

रोहित कुमार साय

अब्राहम तिर्की INC

भरत साय 

उत्तमदान मिंज

पत्थलगांव (अ.ज.जा.)

शिवशंकर पैकरा 

रामपुकार सिंह INC

शिवशंकर पैंकरा

रामपुकार सिंह

लैलूंगा (अ.ज.जा.)

 

सुनीती सत्यानंद राठिया

हृदयराम राठिया INC

सत्यानंद राठिया

चक्रधर प्रसाद सिडार

रायगढ

रोशन लाल अग्रवाल

शक्राजीत नायक INC

रौशन लाल

अग्रवाल प्रकाश नायक

सारंगढ (अ.जा.)

केराबाई मनहर

पदमा घनश्याम मनहर INC

केराबाई मनहर 

 उत्तरी जांगड़े

खरसिया

उमेश पटेल

डा. जवाहरलाल नायक BJP

ओमप्रकाश चौधरी

 उमेश पटेल

 

वेब डेस्क, IBC24

Web Title : Chhattisgarh Election 2018:

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