नवरात्रि का आठवां दिन, मां महागौरी की आराधना

Reported By: Pushpraj Sisodiya, Edited By: Pushpraj Sisodiya

Published on 28 Sep 2017 11:16 AM, Updated On 28 Sep 2017 11:16 AM

मां दुर्गा के नव रूपों में आठवां रूप है माता महागौरी का, महागौरी आदि शक्ति हैं, इनके तेज से संपूर्ण विश्व प्रकाश-मान होता है। महागौरी की चार भुजाएं हैं। उनकी दायीं भुजा अभय मुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में त्रिशूल है। बायीं भुजा से डमरू डम डम बजा रही है और नीचे वाली भुजा से देवी गौरी भक्तों की प्रार्थना सुनकर वरदान देती हैं। इनकी शक्ति अमोघ फलदायिनी है। जो स्त्री देवी की पूजा भक्ति भाव सहित करती हैं उनके सुहाग की रक्षा देवी स्वयं करती हैं। कुंवारी लड़की मां की पूजा करती हैं तो उसे योग्य पति प्राप्त होता है। जो पुरूष देवी गौरी की पूजा करते हैं उनका जीवन सुखमय रहता है देवी उनके पापों को जला देती हैं और शुद्ध अंतःकरण देती हैं।

मां कालरात्रि की पूजा से ऋद्धि-सिद्धि की होगी प्राप्ति

मां अपने भक्तों को अक्षय आनंद और तेज प्रदान करती हैं, महागौरी रूप में देवी करूणामयी, स्नेहमयी, शांत और मृदुल दिखती है। मां दुर्गा की आठवीं शक्ति महागौरी स्वरूप हैं, जो हमें जीवन में पवित्रता और शुचिता बनाए रखने का पाठ पढ़ाती हैं। इनका धवल तन हमें अपनी मलिनता को दूर कर सच्चरित्र बनने की प्रेरणा देता है। मां के इस रूप का ध्यान हमें शांति प्रदान करता है, चरित्र की पवित्रता देता है, इससे हमारे भीतर नैतिक व चारित्रिक बल जाग्रत होता है। तब सभी दोषों व कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। देवी के इस रूप की प्रार्थना करते हुए देव और ऋषिगण कहते हैं “सर्वमंगल मंग्ल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके, शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते।”

 मां दुर्गा के स्कन्द स्वरूप की पूजा

महागौरी के मंत्र-

या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

 

महागौरी पूजन -

कन्या या कंजक पूजन में सामर्थ्य के अनुसार कन्याओं को भोजन के लिए आमंत्रित करते हैं। एक से दस वर्ष तक की कन्याओं का पूजन किया जाता है. कन्या पूजन में सर्वप्रथम कन्याओं के पैर धुलाकर उन्हें आसन पर एक पंक्ति में बिठाते हैं। मंत्र द्वारा कन्याओं का पंचोपचार पूजन करते हैं। विधिवत कुंकुम से तिलक करने के उपरांत उनकी कलाईयों पर कलावा बांधा जाता है।

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इसके पश्चात उन्हें हलवा, पूरी तथा रुचि के अनुसार भोजन कराते हैं। पूजा करने के पश्चात जब कन्याएं भोजन ग्रहण कर लें तो उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें तथा यथा सामर्थ्य कोई भी भेंट तथा दक्षिणा दें कर विदा करें। इस प्रकार श्रद्धा पूर्वक अष्टमी पूजन करने से भक्तों समस्त इच्छाएं पूर्ण होती हैं। महागौरी आराधना से मनोवांछित फल प्राप्त किया जा सकता है। माँ महागौरी का ध्यान, स्मरण, पूजन-आराधना से अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति होती है। 

 नवरात्रि शुरू, प्रथम दिन मां शैलपुत्री की आराधना 

ध्यान मंत्र :-

ओम् ऐं हृीं क्लीं चामुंडायै विच्चे

 

Web Title : Eighth day of Navaratri, Maa Mahagauri ki hogi aradhna

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