छग : पुलिस की ड्यूटी और छुट्टी पर सरकार को 2 माह में फैसला लेने के निर्देश

Reported By: Aman Verma, Edited By: Aman Verma

Published on 27 Sep 2017 01:39 PM, Updated On 27 Sep 2017 01:39 PM

बिलासपुर हाईकोर्ट ने पुलिस की 8 घंटे ड्यूटी और छुट्टी पर 2 माह में सरकार को फैसला करने के निर्देश दिए है। हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मियों को शिफ्ट ड्यूटी, साप्ताहिक अवकाश, बेहतर आवास की सुविधा आदि देने पर सरकार को दो महीने के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मियों की कार्यशैली में सुधार के लिए तत्कालीन डीजीपी की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति ने 5 जून 2017 को रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत की। समिति ने साप्ताहिक अवकाश, आवास, परिवहन और मोबाइल भत्ता बढ़ाने की अनुशंसा की है। वहीं, नक्सल क्षेत्रों में पदस्थ पुलिसकर्मियों को बुलेट प्रूफ जैकेट और तनाव प्रबंधन के लिए व्यवस्था करने की भी अनुशंसा की है। हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त न्याय मित्र ने भी कुछ सुझाव दिए थे। बिलासपुर में रहने वाले बर्खास्त आरक्षक राकेश यादव ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश, तीन शिफ्ट में ड्यूटी की सुविधा, नक्सल प्रभावित या अन्य संवेदनशील जगहों में तैनाती पर बुलेट प्रूफ जैकेट, सभी थानों में कंप्यूटर, फैक्स की सुविधा उपलब्ध करवाने, आरक्षकों को उचित आवास व यात्रा भत्ता की सुविधा देने की मांग की थी।

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हाईकोर्ट ने पूर्व डीजीपी विश्वरंजन की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। इसमें गृह सचिव, वित्त विभाग के संयुक्त सचिव और रायपुर के एसपी को शामिल किया गया था। समिति ने 5 जून 2017 को अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत कर दी थी। इसमें कई मांगों पर सकारात्मक अनुशंसा की गई है। वहीं, शिफ्ट ड्यूटी की मांग को बल की कमी के कारण नामंजूर किया गया था। चीफ जस्टिस टीबी राधाकृष्णन व जस्टिस शरद कुमार गुप्ता की बेंच ने मामले की सुनवाई की। समिति की सिफारिशें ऐसी नहीं हैं कि उससे सरकार पर कोई बड़ा वित्तीय बोझ पड़े। कुछ करोड़ रुपए के खर्च से सिपाहियों का मनोबल बढ़ाने में मदद मिलेगी। अवकाश और 8-8 घंटे की शिफ्ट डयूटी उनकी कार्यक्षमता बढ़ाएगी। 

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राज्य में हरेक सिपाही को कम से कम 10-12 घंटे काम करने पड़ते हैं। उन्हें सरकारी छुट्टियों में भी ड्यूटी करनी पड़ती है। वीकली आफ भी नहीं मिलता। छुट्टी के दिनों में काम का कंपनसेशन के रुप में साल में केवल एक माह का अलाउंस दिया जाता है। जबकि ड्यूटी टोटल में एक माह से अधिक ली जाती है। पुलिस कर्मियों को अभी भी सायकल का भत्ता मिलता है जबकि हर किसी के पास मोटरसाइकल हैं। उन्हें मोटर बाइक भत्ता दिया जा सकता है। न्याय मित्र वकील रजनी सोरेन ने भी पुलिसकर्मियों के लिए कुछ अहम सुझाव दिए हैं। न्याय मित्र ने समिति द्वारा 1200 रुपए यात्रा भत्ता की अनुशंसा को कम बताते हुए 4 से 5 हजार रुपए करने, गृह भाड़ा भत्ता 15 फीसदी की जगह शहरी क्षेत्र में 4-5 हजार और ग्रामीण क्षेत्रों में 3 हजार रुपए करने और मोबाइल अलाउंस को 200 रुपए की जगह इंटरनेट का खर्च जोड़ते हुए 465 रुपए करने का सुझाव दिया गया है।

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समिति ने माना है कि नक्सल क्षेत्र में पदस्थ पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश जोड़कर तीन माह के अंतराल में एकमुश्त अवकाश दिया जाना चाहिए। कर्मचारियों को अवकाश देने पर बल की कमी की समस्या होगी। ड्यूटी पर रहने वाले कर्मियों पर बोझ बढ़ेगा, इसे ध्यान में रखते हुए 15 फीसदी अतिरिक्त बल की जरूरत पड़ेगी। इसी तरह आठ-आठ घंटे की शिफ्ट ड्यूटी लागू करने पर करीब दोगुने बल की जरूरत होगी। बल के अभाव में शिफ्ट ड्यूटी लागू कर पाना संभव नहीं है। शरद अग्रवाल, आईबीसी 24, बिलासपुर। खबरों पर अपनी राय देना न भूलें

Web Title : Government to decide on duty and leave of police in 2 months - High court