जनादेश 2019: भगवे की लहर में दिग्गजों के किले परास्त, ये हार बहुत भारी है!

 Edited By: Vivek Mishra

Published on 24 May 2019 01:36 PM, Updated On 24 May 2019 01:19 PM

भोपाल। हिंदुस्तान के आम चुनावों के दौरान मोदी की सुनामी में कांग्रेस दिग्गजों के किले ताश के पत्तों जैसे बिखर गए। मोदी की सुनामी में पार्टी के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी भी अपना घर नहीं बचा सके। खुद राहुल गांधी के किचन कैबिनेट मेंबर ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह, मीनाक्षी नटराजन जैसे दिग्गज मध्यप्रदेश में अपनी सीट नहीं बचा सके। सैफरॉन आंधी ऐसी चली की बड़े बड़े कांग्रेसी दिग्गज पहली बार चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के मुकाबले लाखों वोटों के अंतर से हार गए। हालांकि मध्यप्रदेश में मोदी लहर के असर से सिर्फ छिंदवाड़ा सीट बची रही।

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पूरे देश की तरह मध्यप्रदेश में भी जमकर मोदी मैजिक चला है। इस मोदी मैजिक में विपक्षी साफ हो गए हैं। बीजेपी ने एमपी में क्लीन स्वीप किया है। बीजेपी के क्लीन स्वीप में कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेताओं को बुरी हार का सामना करना पड़ा है। गुना शिवपुरी से ज्योतिरादित्य सिंधिया, भोपाल से दिग्विजय सिंह, खंडवा से अरुण यादव, सीधी से अजय सिंह, मंदसौर से मीनाक्षी नटराजन को मोदी के मैजिक के चलते जमीन देखनी पड़ गई।

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इन दिग्गजों के सामने ऐसे भी प्रत्याशी थे जो पहली बार चुनाव लड़ रहे थे, कांग्रेस इन प्रत्याशियों को मुकाबले में भी नहीं मान रही थी, लेकिन भगवे की लहर ऐसी चली की सियासत में नए नवेले प्रत्याशियों ने दिग्गजों के किलों को ध्वस्त कर दिया। हालांकि देशभर के साथ ही मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस की करारी शिकस्त का अंदाजा कांग्रेस को नहीं था, लेकिन कांग्रेस को उम्मीद थी कि मोदी लहर के बावजूद मध्यप्रदेश में पार्टी 10 सीट तो जरुर जीत जाएगी, लेकिन हुआ उल्टा। कांग्रेस सिर्फ एक सीट छिंदवाड़ा ही जीत सकी लेकिन वहां भी पार्टी की सांसे आखिरी राउंड तक अटकी ही रही।

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की परंपरागत सीट छिंदवाड़ा में उनके बेटे नकुलनाथ 37 हजार वोटों के साथ सबसे कम अंतर से जीतने वाले प्रत्याशी बने। बीजेपी का दावा है की हिंदुस्तान के 90 करोड़ वोटर्स ने मजबूत और ईमानदार सरकार को वोट किया है, न की झूठ बोलने और देश को बांटने वाली ताकतों को।

लिहाजा मध्यप्रदेश में कांग्रेस के कई क्षेत्र की हार पिछले 6 महीने में दो बार हुई है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव विधानसभा चुनावों के बाद दूसरी बार 6 महीने के भीतर चुनाव हार चुके हैं। खिसकते जनाधार के बाद लगातार हार रहे कांग्रेस के दिग्गजों का सियासी करियर अब खत्म होता नजर आ रहा है। देखना दिलचस्प होगा की खत्म होने के बाद फिर खड़ी हो जाने का इतिहास रखने वाली कांग्रेस पार्टी अगले चुनावों तक कैसे खुद को मोदी के मुकाबले खड़ा कर पाती है।

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जानिए प्रदेश में कांग्रेस के बड़े दिग्गज कहां से हुए परास्त

बीजेपी प्रत्याशी केपी यादव ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को 1 लाख 25549 वोटों से हराया
बीजेपी प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने दिग्विजय सिंह को 3 लाख 64 हजार 822 वोटों से हराया
बीजेपी प्रत्याशी राकेश सिंह ने विवेक तन्खा को 4 लाख 54 हजार 744 वोटों से हराया
बीजेपी प्रत्याशी नंदकुमार सिंह चौहान ने अरूण यादव को 2 लाख 73 हजार 343 वोटों से हराया
बीजेपी प्रत्याशी रीति पाठक ने अजय सिंह को 2 लाख 86 हजार 524 वोटों से हराया
बीजेपी प्रत्याशी सुधीर गुप्ता ने मीनाक्षी नटराजन को 3 लाख 76 हजार 734 वोटों से हराया

Web Title : Mandate 2019: In the wave of saffron, the fort of the legends is defeated, this necklace is very heavy!

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