हिंदी दिवस के मौके पर प्रवीन कुमार गुप्ता द्वारा लिखी गई खास कविता

Reported By: Pushpraj Sisodiya, Edited By: Pushpraj Sisodiya

Published on 14 Sep 2017 04:13 PM, Updated On 14 Sep 2017 04:13 PM

हिंदी हूं मैं.....

 

अभिमान हमें है खुद पर

कि हम ‘हिन्दी’ हैं

देश हमारा हिन्दी है

वेश हमारा हिन्दी है

हम हिन्दी खाते-पीते हैं

हिन्दी में ही जीते-मरते हैं

रोटी थाली में हिन्दी की

घूंट नीर के हिन्दी हैं

हंसी-ठिठोली हिन्दी की

करुणा, क्रंदन हिन्दी है

वेग पवन का हिन्दी है

तो बहती जलधारा हिन्दी है

मिलना-जुलना हिन्दी है

और बिछड़े तो दुख हिन्दी है

हिन्दी ही आवेग हमारा

और ठहरे तो हिन्दी है

रस्ता, मंजिल, पग-पग हिन्दी

जीवन सफर भी हिन्दी है

उठकर गिरना गिरके संभलना

हर सीख बड़ों की हिन्दी है

भाषा तो कई एक मगर

खून में बसती हिन्दी है........

Web Title : On the occasion of Hindi Diwas A special poem on hindi written by Nveen Kumar Gupta

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