नवरात्र का दूसरा दिन : मां ब्रह्मचारिणी की पूजा कर पायें ज्ञान का भंडार

Reported By: Aman Verma, Edited By: Aman Verma

Published on 22 Sep 2017 10:27 AM, Updated On 22 Sep 2017 10:27 AM

नवरात्र पर्व के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। देवी ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में अक्ष माला है और बायें हाथ में कमण्डल होता है। देवी ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप हैं। ब्रह्मचारिणी का अर्थ, तप का आचरण करने वाली होता है। देवी ब्रह्मचारिणी हिमालय की पुत्री हैं, हजारों वर्षों तक तपस्या करने पर ही इनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। इनको ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी माना जाता है. इसलिए इस देवी का स्वरुप एक तपस्विनी का है जिसे सभी विद्याओं का ज्ञाता माना जाता है। छात्रों और तपस्वियों के लिए इनकी पूजा बहुत ही शुभ फलदायी है, इनकी साधना से व्यक्ति को कर्मठता, ज्ञान, वर्चस्व, अटूट शक्ति, बुद्धिमत्ता की प्राप्ति होती है।

प्रथम दिन मां शैलपुत्री की आराधना 

देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से मनचाहे फल की प्राप्ति होती है। माँ के इस रूप का पूजन करने से आलस्य, अहंकार, लोभ, स्वार्थ, असत्य व ईष्या जैसी बुराइयां दूर होती हैं और तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार व संयम जैसे गुणों की वृद्धि भी होती है। देवी ब्रह्मचारिणी अपने भक्तों को कठिन परिश्रम कर सफलता प्राप्त करने का सन्देश देती हैं साथ ही जीवन की कठिनाइयों में आशा व विश्वास के साथ कर्तव्यपथ पर चलने का भी सन्देश देती हैं। माँ का यह रूप समग्र शक्तियों को एकाग्र कर विवेक व धैर्य के साथ सफलता की राह पर चलने की सीख देता है। देवी ब्रह्मचारिणी हर समस्या से समाधान पाने के लिए दिशा प्रदान करती है। 

 

पूजा विधि :-

देवी ब्रह्मचारिणी जी की पूजा का विधान इस प्रकार है, सर्वप्रथम देवी की फूल, अक्षत, रोली, चंदन, से पूजा करें उन्हें दूध, दही, शर्करा, घृत, व मधु से स्नान करायें व देवी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में फूल लेकर प्रार्थना करें। घी व कपूर मिलाकर देवी की आरती करें। देवी को प्रसाद अर्पित करें। प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारी भेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करें।

अंत में क्षमा प्रार्थना करें, दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

Web Title : Second day of Navaratri : Today do Worship of Maa Brahmacharini

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