रॉक पाइथन देखने के शौकीन हैं तो जरूर जाइये अजगर दादर

 Edited By: Renu Nandi

Published on 08 Dec 2018 04:48 PM, Updated On 08 Dec 2018 04:47 PM

मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थल के बारे में बहुत सी बातें प्रसिद्ध है इन्ही में से एक है मंडला के अंजनिया वन परिक्षेत्र का कैकया गांव जो दो एकड़ में सिर्फ अजगर बस्ती के लिए प्रसिद्ध है। बता दें कि कान्हा नेशनल पार्क का यह एरिया अजगर का प्रिय स्थान है। यहां के चट्टानों और गुफाओं में सिर्फ अजगर निवास करते हैं जो ठण्ड के मौसम में धुप सेंकने निकलते हैं।


ज्ञात हो कि अजगरों की इस बस्ती को अजगर दादर नाम से जाना जाता है। यहां ठंड के दिनों में एक – दो नहीं बल्कि सैंकड़ों अजगरों को धूप सेंकते देखा जा सकता है।बताया जाता है कि इस जंगल में अधिक संख्या में अजगर का वास होने के कारण ही इसका नाम अजगर दादर पड़ गया है। इन अजगरों के साथ अब ग्रामीणों का भी खास लगाव हो गया है जिसके चलते ग्रामीण वर्षों से विशेष पर्वों में इन अजगरों की पूजापाठ करते चले आ रहे है।इतना ही नहीं यहाँ जाने के बाद समझ आएगा कि यहां पर अजगर और इंसानो के बीच खास रिश्ता है।इस गांव की यह खासियत है कि ग्रामीण को अजगरों से कभी खतरा महसूस नहीं होता।


बताया जाता है कि सन 1926 में आई बाढ के बाद यह इलाका पूरी तरह पोला हो गया तो यहाँ चूहों गिलहरी आदि ने अपना बसेरा बना लिया। इसी पोले स्थान को अजगरों ने भी अपना आशियाना बना लिया और यह इलाका अजगर दादर कहलाने लगा। बडा शरीर वाला अजगर अपनी मस्तानी चाल से बेफिक्र चल कर धूप सेंकता है तो अन्य अजगर चटटानों के बीच सुरक्षात्मक तरीके से आराम फरमाते है।इन सब में गौर करने वाली बात यह है कि बाघों की धरती कान्हा टाइगर रिज़र्व के लिए पूरे विश्व में पहचाना जाने वाला ये आदिवासी जिला अजगरों की बस्ती के लिए भी विश्व पटल पर खुद को स्थापित कर रहा है।


ठण्ड के मौसम में छोटे - बड़े सैकड़ों की संख्या में अजगर ( रॉक पाइथन ) इस छेत्र मैं आसानी से देखे जा सकते है । जानकार जंहा इन अजगरों को वन्य प्राणियों में अनुसूची एक का अति दुर्लभ प्राणी है वही इसके सरक्षण की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं । वन अधिकारी कहते है कि जंहा इनके सरक्षण संवर्धन की योजना तैयार की जा रही है वंहिं अनुसंधान कर्ता कहते है कि अजगर दादर मैं पाये जाने वाले अजगर दुर्लभ प्रजाति के हैं और ये जाड़े के मौसम में न सिर्फ धुप सेकने अपने बिलों से बाहर निकलते है बल्कि यह समय इनके सहवास का होता है । स्वभावतः अकेले रहने वाला रॉक पाइथन सहवास के दौरान ही समूह मैं पाया जाता है जबकि उक्त स्थान मैं इनका सैकड़ों की संख्या में मौजूद होना उक्त स्थान की भौगोलिक परिस्थित को मानते हैं । ग्रामीणों का कहना है कि उक्त क्षेत्र मैं अजगरों का डेरा आज से नहीं बल्कि वर्षों से है । अब जब इन अजगरों की जानकारी ग्रामीणों के अलावा वन विभाग व् वन्य प्राणी प्रेमियों को लगी है तो उक्त क्षेत्र को सरक्षित करने के प्रयास प्रारम्भ किये जा रहे हैं ।

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