देखिए डबरा विधानसभा सीट के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड

Reported By: Shahnawaz Sadique, Edited By: Shahnawaz Sadique

Published on 22 Oct 2018 04:03 PM, Updated On 22 Oct 2018 04:03 PM

ग्वालियर। विधायकजी के रिपोर्ट कार्ड में आज बारी है मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले की डबरा विधानसभा सीट। ये सीट कभी बीजेपी का अभेद्य किला हुआ करता थालेकिन 2008 में इमरती देवी इस किले में सेंध लगाने में सफल हुई और 2013 में भी जीत का सिलसिला जारी रखालेकिन बीजेपी एक बार फिर अपनी खो हु सीट को हासिल करने के लिए पूरे जीजान से जुट गई हैहालांकि डबरा में दो गुटों मे बंटी बीजेपी के लिए यहां वापसी करना इतना आसान नहीं होगा

मध्यप्रदेश के हाईप्रोफाइल और खास सीटों में शामिल है डबरा विधानसभा खास इसलिए क्योंकि ग्वालियर जिले में आने वाली इस सीट की राजनीति लंबे समय तक बीजेपी के नरोत्तम मिश्रा के इर्द-गिर्द रहीहालांकि परिसीमन के बाद ये यहां की सियासी फिजा बदली और सीट कांग्रेस के पाले में चली गई। 2008 से सीट पर कांग्रेस का कब्जा है और इमरती देवी लगातार दो बार से यहां विधायक हैं।

वैसे डबरा विधानसभा क्षेत्र के सियासी इतिहास की बात करें तो 1990 में नरोत्तम मिश्रा पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने 1998 और 2003 का चुनाव भी जीतालेकिन 2008 में डबरा विधानसभा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई और नरोत्तम मिश्रा का चुनाव क्षेत्र बदल गया। 2008 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ी इमरती देवी ने बीजेपी के इस गढ़ में सेंध लगाईइसके बाद 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने फिर उन पर भरोसा जताया और इमरती देवी ने बीजेपी प्रत्याशी सुरेश प्रत्याशी को शिकस्त दीइस चुनाव में कांग्रेस को जहां 67764  वोट मिले वहीं बीजेपी को 34486 वोट मिलेइस तरह जीत का अंतर 33278 वोटों का रहा।

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कांग्रेस विधायक इमरती देवी सिंधिया गुट की मानी जाती है साथ ही साथ वो अपने अक्खड़पन को लेकर अक्सर चर्चा में रहती हैयूपीए सरकार में मंजूर हुआ स्टील प्लांट बिलौआ में एनडीए की सरकार में लगाया जा रहा था। सका क्रेडिट बीजेपी के केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर लेने चाहते थे, तब इसे लेकर इमारती देवी ने खुले मंच पर जमकर हंगामा किया थाअपने व्यवहार के लिए चर्चा में रहने वाली इमरती देवी हालांकि इस बार अपने कार्यकाल को लेकर विपक्ष के निशाने पर हैबीजेपी के मुताबिक उनके पास गिनाने के लिए एक भी उपलब्धि नहीं है, जिसे वे जनता के पास जाकर बता सकें

डबरा विधानसभा क्षेत्र में जाति समीकरण भी बेहद खास हैयहां सबसे ज्यादा दखल हरिजन, जाटव, ब्राह्मण, रावत, कुशवाह और साहू समाज का है, जो चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। साथ ही बघेल, गुर्जर, सेन समाज, परिहार, आदिवासी समाज भी चुनाव को काफी हद तक प्रभावित करते हैं। लेकिन इस बार देखना होगा कि डबरा के वोटर्स का आशीर्वाद किसे मिलता है।

मुद्दों की बात की जाए तो डबरा में कई ऐसी मूलभूत समस्याएं हैं, जिन्हें दूर करने का वादा कांग्रेस विधायक ने पिछले चुनाव में किया था लेकिन पांच साल गुजर जाने के बाद भी हालात जस के तस हैंडबरा विधानसभा में प्रदेश की सबसे ज्यादा खनिज की खदानें हैं, जहां अवैध उत्खनन धड़ल्ले से जारी है तो वहीं सिंध नदी में भी पनडुब्बी लगाकर रेत का अवैध उत्खनन किया जाता है। जिस पर अब तक रोक नहीं लगाया जा सका हैवहीं शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार का मुद्दा भी आने वाले चुनाव में गूंजना तय है।

परिसीमन के बाद डबरा विधानसभा क्षेत्र की सियासी फिजा बदली तो यहां सत्ता का चेहरा भी बदल गयालेकिन नहीं बदली तो यहां के लोगों की किस्मत डबरा के बाशिंदे आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैंइमरती देवी के पिछले कार्यकाल की बात करें तो उन्होंने शहर और ग्रामीण इलाकों में पेयजल समस्या के निदान के लिए कोई ठोस काम नहीं करवाया, जिसे लेकर लोगों में विधायक को लेकर काफी शिकायतें हैं। गर्मी में डबरा शहर में पानी की एक-एक बूंद के लिए लोगों को तरसना पड़ा और अपनी जरूरत के लिए टैंकर खरीद कर अपना गुजारा किया। डबरा विधानसभा क्षेत्र में अवैध रेत खनन का मुद्दा भी आने वाले चुनाव में गूंजना तय हैदरअसल अवैध रेत के परिवहन और लगातार इससे हो रही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कोई खास इंतजाम नहीं हैं।

वहीं स्वास्थ्य सुविधाओं का भी बुरा हाल है यहां का इकलौता सिविल अस्पताल अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। हालांकि कांग्रेस विधायक का कहना है कि वो अपनी विधायक निधि से तो काम कर रही है। उनके मुताबिक उन्होंने लगातार अपने क्षेत्र में अवैध उत्खनन और सड़कों के मुद्दे को विधानसभा में उठा रही हैं, लेकिन सरकार उनकी नहीं सुनती है।

कांग्रेस विधायक लाख दावे करें कि उन्होंने क्षेत्र में बेहतर विकास कार्य करवाया हैलेकिन धरातल पर ज्यादा कुछ नजर नहीं आतासड़कों की बात करें तो मैन रोड को छोड़कर डबरा नगर की सारी सड़क खुदी पड़ी हुई हैइसके अलावा बेरोजगारी यहां एक बड़ी समस्या हैडबरा विधानसभा में 300 मील हुआ करती थी। आज 15 से 20 मिल बंद है। दाल मिल, चावल मिल, डबरा में एक शुगर मिली हुआ करती थी। वो भी बंद पड़ी हैयही वजह है कि डबरा विधानसभा के वोटर्स इमरती देवी से उनके बीते दस सालों का हिसाब मांग रहे है। वहीं बीजेपी और आम आदमी पार्टी इमारती देवी को इन मुद्दों को लेकर घेरने के फिराक में है।

कुल मिलाकर मिशन 2018 को लेकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों के बीच इस सीट को हथियाने के लिए नूरा कुश्ती का खेल शुरू हो चुका है। लेकिन इस बार जमीनी मुद्दे हावी रहते है, या फिर चुनावी शिगूफे, जिस पर जनता अपना वोट करेगी।

चुनावी साल है तो, डबरा विधानसभा क्षेत्र में टिकट के लिए नेता जोड़तोड़ में जुट गए हैंसीट पर संभावित दावेदारों की बात की जाए तो कांग्रेस में जहां सीटिंग एमएलए इमरती देवी के अलावा कोई दूसरा विकल्प नजर नहीं आतावहीं बीजेपी में उम्मीदवारों की लंबी फेहरिस्त हैऐसे में बीजेपी आलाकमान के लिए यहां सही उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतरना सबसे बड़ी चुनौती हैअगर पार्टी इसमें चूक करती है तो एक बार फिर इमरती देवी को फायदा मिलना तय है।

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मध्यप्रदेश की सियासत में ये दो सूरमा किसी पहचान के मोहताज नहीं हैएक हैं केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और दूसरे हैं मप्र सरकार में जल संसाधन मंत्री नरोत्तम मिश्राये दोनों दिग्गज राजनीतिक मंचों पर तो एक साथ नजर आते हैंलेकिन डबरा की राजनीति में कहानी जरा हटकर हैटिकट के लिए दोनों गुट के कार्यकर्ताओँ में एक दूसरे को पटखनी देने की होड़ मची रहती है, जिसका फायदा हर चुनाव में कांग्रेस की इमरती देवी को मिलता हैऐसा नहीं है कि बीजेपी आलाकमान इस गुटबाजी से अंजान होउसकी भी कोशिश है कि सबकुछ ठीक हो जाएमिशन 2018 में भी बीजेपी की राह यहां इतनी आसान नहीं हैकई नेता हैं जो टिकट के लिए जोर आजमाईश कर रहे हैं संभावित उम्मीदवारों में पहला नाम पूर्व प्रत्याशी सुरेश राजे और आरएसएस कार्यकर्ता हरीश मेवाफरोश का नाम इस सूची में सबसे ऊपर है

इन दोनों नेताओं के अलावा नरेंद्र तोमर गुट के कप्तान सिंह सहसारी और दयाल परिहार की भी दावेदारी सामने है। वहीं भागीरथ कोरी, दिनेश खटीक और एनसी कोरी जैसे नेता भी बीजेपी के दावेदारों में शामिल हैं। डबरा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस पर नजर डाले तो यहां सीटिंग एमएलए इमरती देवी के अलावा कोई विकल्प नजर नहीं आताइसलिए वो भी पूरे आत्मविश्वास के साथ कहती हैं कि उनकी टिकट काटने वाला कोई नहीं।

डबरा में 2018 के विधानसभा चुनाव में आप पार्टी और बीएसपी भी चुनावी मैदान में रहेंगी। बीएसपी से सत्य प्रकाश परसेडिया की दावेदारी सबसे मजबूत है। डबरा विधानसभा क्षेत्र में अधिकांश जाटव समाज के वोट हैं और यदि परसेड़िया चुनाव मैदान में उतरती हैं, तो जाटव समाज के वोट आधे हो सकते हैं और इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है।

वेब डेस्क, IBC24

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