जानिए आपके लिए क्या-क्या संजोए बैठा है बुंदेलखंड का समृद्ध इतिहास

Reported By: Pushpraj Sisodiya, Edited By: Pushpraj Sisodiya

Published on 13 Apr 2017 09:41 PM, Updated On 13 Apr 2017 09:41 PM


बुंदेलखंड क्षेत्र उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बसा है. अपने भौगोलिक विस्तार, सांस्कृतिक विविधता और इतिहास के कारण बुंदेलखंड को बेहद करामाती और शानदार शहर का दर्जा मिला है. इ इससे फार्मिंग और टूरिज्म दोनों को फायदा होगा. बुंदेलखंड की ट्रिप में आपको बंजर पहाड़ियां, जंगल और गहरे नाले बहुत मिल जाएंगे. लेकिन आप मानसून में यहां के सफर पर आएंगे तो नदियों में कल-कल करती पानी की धारा आपका मन मोह लेगी. साथ ही यहां चारों ओर हरियाली ही हरियाली नजर आएगी जिस पर आप मंत्र-मुग्ध हो जाएंगे।

अपनी बुंदेलखंड यात्रा की शुरुआत झांसी से करें. झांसी के किले में 1857 में रानी लक्ष्मी बाई का ऐतिहासिक युद्ध भी यहां की खास बात है. ठंडी-ठंडी हवा के साथ बारिश की बूंदें आपके तन-मन को छू लेंगी. झांसी फोर्ट के लॉन, हाथी दर्शनीय है। इसके पास में ही रानी महल भी है, जो रानी का निवास हुआ करता था. वहां महारानी लक्ष्मीबाई पार्क भी है, जहां हर शाम लाइट एंड साउंड शो होता है. गणेश मंदिर, स्टेट म्यूजियम भी आकर्षण के अन्य केंद्र हैं।

जब आप झांसी से बाहर महोबा रोड पर जाते हैं तो 9वीं सदी में बने जराई का मठ मंदिर जरूर देखें. इस मंदिर में शक्ति की अराधना होती है. इसी रोड पर आगे ट्रेवल करते समय आपको खूबसूरत बरूआ सागर झील और किला देखने को मिलेगा. कुछ किलोमीटर आगे जाने पर आप जलाशयों की दुनिया से रूबरू होंगे. पहुज डैम, परीछा डैम, तलबेहत और माताटीला डैम के निर्मल शांत पानी से आपको बहुत सुकून मिलेगा।

झांसी से 120 किलोमीटर दूर ललितपुर के पहाड़ी इलाके के पास बेतवा नदी के किनारे फोर्ट ऑफ द गॉड्स स्थित है. देवघर से कुछ किलोमीटर पहले महावीर स्वामी सेंचुरी है. इसके पास ही गुप्त वंश के समय बना दशावतार मंदिर भी है. देवघर के करीब आते ही आप एक पहाड़ी पर बने 31 जैन मंदिर देखेंगे जो 9वीं सदी में बने थे. पहाड़ी के पास ही एक जंगल है, जिसमें सिद्धी गुफा है।

ललितपुर में दरगाह हजरत सदन शाह और छत्रपाल जैन मंदिर देखने लायक जगह है. देवघर में पांडव वन भी है. कहा जाता है कि पांडवों ने यहां अपना वनवास काटा था. बेतवा नदी घाटी के पास मचकुंड गुफा फेमस टूरिस्ट स्पॉट है।
बांदा से 69 किलोमीटर और झांसी से 280 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कालिंजर किले की यात्रा आपके लिए यादगार रहेगी. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. इस किले में शिवलिंग और देवी-देवताओें की मूर्तियां पत्थर की दीवारों पर उकेरी गई हैं।

यह झांसी से 140 किलोमीटर दूर है. बारिश के मौसम में अगर आप महोबा जाते हैं तो आपको फूलों और हरियाली से घिरी हुईं बहुत सी छोटी पहाड़ियां और झिलमिलाती झीलें दिख जाएंगी. महोबा फोर्ट पहाड़ पर स्थित है. चंदेलों द्वारा बनाई गईं झीलें अपने सफल वॉटर मैनेजमेंट सिस्टम के कारण बेहतरीन इंजीनियरिंग का नमूना मानी जाती हैं।

महोबा पान उत्पादन के लिए भी जाना जाता है. महोबा से

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