कश्मीर में पत्थरबाज़ों को उन्हीं की भाषा में सबक सिखाना चाहते हैं ये आदिवासी...

Reported By: Pushpraj Sisodiya, Edited By: Pushpraj Sisodiya

Published on 20 Apr 2017 11:09 AM, Updated On 20 Apr 2017 11:09 AM


जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजों की बढ़ती हरकतों से देशभर में गुस्से का माहौल है. टीवी से लेकर सोशल मीडिया और अखबारों में जवानों पर पत्थरबाजों के हमले की खबरें पढ़कर झाबुआ जिले के आदिवासी युवा भी दुखी और गुस्से में है. जो पत्थरबाजों को उन्हीं की भाषा में सबक सिखाने को तैयार है. और सरकार से इसकी इजाजत मांग रहे है.

ये है आदिवासी युवाओं की वो फौज जो कश्मीर के पत्थरबाजों को उन्हीं की भाषा में सबक सिखाना चाहती है. और ये है. इनका वो खास हथियार. जिसके जरिए आदिवासी युवा कश्मीर के पत्थरबाजों से निपटना चाहते है. इस हथियार का नाम है गोफन. गोफन की मदद से फेंका गया पत्थर.

हाथ से फेंके गए पत्थर से 4 से 5 गुना तेजी से जाता है और निशाना भी अचूक. गोफन के इस्तेमाल में माहिर ये आदिवासी चाहते है. कि सरकार आदिवासी युवाओं की गोफन बटालियन बना कर उन्हें कश्मीर में उतार दें. ताकि वो जवानों पर पत्थर बरसा रहे पत्थरबाजों को जवाब दे सकें.

इन आदिवासी युवाओं का कहना है कि वो जब भी जवानों पर पत्थरबाजी की खबरें देखते या सुनते है. तो इनकी आंखों में आंसू आ जाते है. इनका खून खौल उठता है. ऐसे में इन युवाओं का मानना है कि कश्मीर के पत्थरबाजों का इलाज झाबुआ के गोफन मॉडल से ही हो सकता है. फिलहाल ये युवा झाबुआ की हाथीपावा पहाड़ी पर प्रैक्टिस में लगे है. इन्हें इस बात की उम्मीद है. कि सरकार इन्हें पत्थरबाजों से निपटने का मौका जरूर देगी.

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