आंखों की रोशनी बढ़ाने करें सिंहासन  

Reported By: Samrendra Sharma, Edited By: Samrendra Sharma

Published on 02 Jul 2018 05:23 PM, Updated On 02 Jul 2018 05:23 PM

योग करने के पहले बहुत सी बातों को ध्यान देना जरुरी होता है। वैसे तो 84 प्रकार के योगासन बताए गए हैं। लेकिन यह भी सही है कि हम  सभी आसन रोज नहीं कर सकते। इसलिए हम जब भी योग के कुछ चुनिंदा आसन करे इस बात का खास ध्यान रखें की कौन से आसन हमारे शरीर के लिए लाभ दायक है। आज हम योग से आँखों के उपचार कैसे हो सकता है.इस बात को ध्यान में रख कर सिंहासन  कैसे करें और इस आसन से अन्य लाभ क्या है इस पर चर्चा करेंगे। 

 सिंहासन  

सिंहासन चौरासी आसनों में से एक है। इसे ‘भैरवासन’ भी कहा जाता है। इस आसन की मुखमुद्रा (चेहरे की बनावट) जब वज्रासन और भद्रासन में की जाती है, तब यह वज्रासन या भद्रासन सिंहासन के रूप में जाना जाता है।

 

सिंहासन करने की प्रक्रिया -

दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ कर पीछे की ओर ले जाएँ। फिर पैरों के पंजों पर बैठ जाएँ। एड़ियाँ नितंब के दोनों ओर होनी चाहिए।

दोनों घुटने एक-दूसरे से लगभग छ: इंच दूर रखें।

दाएँ हाथ का पंजा दाएँ घुटने पर और बाएँ हाथ का पंजा बाएँ घुटने पर रखें। नथुनों  और मुँह से थोड़ी-थोड़ी साँस छोड़ते जाएँ और साथ ही जीभ मुँह से बाहर निकालें।

जीभ निकालने की क्रिया पूरी होने के साथ साँस भी पूरी तरह बाहर निकल जानी चाहिए। अब साँस लेना बंद करें।

कमर को सीधी रखिए। मुँह की सभी स्नायुओं  को खींच कर इस ढंग से पूरी आँखें खोलें कि चेहरा शेर जैसा लगे।

सामने देखिए और इसी स्थिति में छ: से आठ सेकंड तक स्थिर रहिए।

आरंभ में एक सप्ताह तक यह क्रिया प्रतिदिन दो बार करें। कुछ अभ्यास हो जाने के बाद यह क्रिया प्रतिदिन चार बार करें।

सिंहासन करने के अन्य लाभ 

स्मरणशक्ति बढ़ाने के लिए यह आसन बहुत ही उपयोगी माना जाता है।

गले अथवा आवाज की तकलीफ या टांसिल में सूजन की अवस्था में यह आसन दवाई का काम करता है।

यह आसन सीने और पेट के रोग दूर करता है।

इस आसन से तुतलापन मिटता है, कान तथा त्वचा को लाभ पहुँचता है।

इस आसन से मुँह की सुंदरता और तेज में वृद्धि होती है।

यह आसन करने से वज्रासन के सभी लाभ प्राप्त होते हैं।

इस आसन से स्वस्थ एवं मधुर स्वर का विकास होता है।

वेब डेस्क IBC24

Web Title : Yoga For Eyes:

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