मुक्केबाज निकहत, पंघाल और नीतू फाइनल में, रजत पदक पक्के |

मुक्केबाज निकहत, पंघाल और नीतू फाइनल में, रजत पदक पक्के

मुक्केबाज निकहत, पंघाल और नीतू फाइनल में, रजत पदक पक्के

: , August 6, 2022 / 08:06 PM IST

बर्मिंघम, छह अगस्त (भाषा) मौजूदा विश्व चैम्पियन मुक्केबाज निकहत जरीन ने शनिवार को यहां राष्ट्रमंडल खेलों की महिलाओं की 48 किग्रा भारवर्ग में इंग्लैंड की अल्फिया सवान्नाह को शिकस्त देकर फाइनल में जगह पक्की की।

उन से पहले अमित पंघाल (51 किग्रा) ने पुरूषों की फ्लाईवेट स्पर्धा में जबकि पदार्पण कर रही नीतू गंघास ने महिलाओं के (45-48 किग्रा) मिनिममवेट के फाइनल में प्रवेश कर रजत पदक पक्के किये।

निकहत ने सेमीफाइनल मुकाबले में 5-0 से जीत दर्ज की। उन्होंने दमदार शुरूआत करने के बाद तीनों दौर में अपना दबदबा कायम रखा।

सबसे पहले रिंग में उतरी नीतू अपने पहले ही राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक मुकाबले में पहुंच गयी जिसमें वह इंग्लैंड के रेश्जटान डेमी जेड के सामने होंगी। उन्होंने सेमीफाइनल में कनाडा की प्रियंका ढिल्लों को आरएससी (रैफरी द्वरा मुकाबला रोकना) से पराजित कर अपना रजत पदक पक्का किया।

इसके बाद पंघाल रिंग में उतरे, उन्होंने शानदार प्रदर्शन के बूते राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार फाइनल में प्रवेश किया। पिछली बार उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा था जिससे इस बार वह पदक का रंग बदलना चाहेंगे।

उन्होंने सेमीफाइनल में जिम्बाब्वे के पैट्रिक चिनयेम्बा को सर्वसम्मत फैसले में 5-0 से पराजित किया। सात अगस्त को फाइनल में उनका सामना इंग्लैंड के मैकडोनल्ड कियारान से होगा।

पंघाल ने पीटीआई से कहा, ‘‘मैं जानता हूं कि अगला मुकाबला मुश्किल होगा क्योंकि मेजबान मुक्केबाज के लिये ज्यादा उत्साहवर्धन होगा लेकिन मैं ध्यान लगाये हूं। इस बार हाथ से नहीं जाने दे सकता। ’’

इक्कीस साल की नीतू के आत्मविश्वास साफ झलक रहा था, वह ‘ओपन गार्ड’ खेल रही थी ताकि प्रतिद्वंद्वी को मुक्के मारने के लिये उकसा सकें और वह अपने सीधे मुक्केबाजें का बखूबी इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने लगातार ‘एक-दो’ मुक्कों से दबदबा बनाया जिससे रैफरी को मुकाबला रोकने के लिये बाध्य होना पड़ा।

वहीं 26 साल के पंघाल पर उनके आक्रामक प्रतिद्वंद्वी ने शुरू में ही मुक्कों की बरसात कर दी जिससे विश्व चैम्पियनशिप का रजत पदक मुक्केबाज शुरूआती राउंड में 2-3 से पिछड़ गया था।

लेकिन तोक्यो ओलंपिक के निराशाजनक प्रदर्शन को पीछे छोड़ने की कोशिश में जुटे पंघाल ने अपने अनुभव का फायदा उठाकर अपनी मर्जी के मुताबिक ‘हुक्स और जैब्स’ लगाने के बाद प्रतिद्वंद्वी को हावी होने का मौका नहीं दिया और जजों ने भारतीय मुक्केबाज के पक्ष में फैसला दिया।

भाषा

नमिता आनन्द मोना

मोना

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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