सिंड्रेला दास का लक्ष्य, एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना और शीर्ष 50 में जगह बनाना

सिंड्रेला दास का लक्ष्य, एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना और शीर्ष 50 में जगह बनाना

सिंड्रेला दास का लक्ष्य, एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना और शीर्ष 50 में जगह बनाना
Modified Date: September 15, 2026 / 12:50 pm IST
Published Date: September 15, 2026 12:50 pm IST

(देवार्चित वर्मा)

मुंबई, 15 सितंबर (भाषा) भारतीय टेबल टेनिस में तेजी से उभरती 17 वर्षीय खिलाड़ी सिंड्रेला दास का लक्ष्य एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना और जल्द से जल्द विश्व रैंकिंग में शीर्ष 50 में जगह बनाना है।

सिंड्रेला अभी आईटीटीएफ (अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस महासंघ) की महिला एकल रैंकिंग में 99वें जबकि युवा वर्ग में 27वें स्थान पर काबिज हैं। उन्हें विश्वास है कि वह जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई खेलों में अपनी अच्छी फॉर्म बरकरार रखने में सफल रहेंगी।

पिछले महीने राष्ट्रीय रैंकिंग टेबल टेनिस चैंपियनशिप में महिला एकल और अंडर-19 लड़कियों के एकल में खिताब जीतने से कोलकाता की सिंड्रेला पर सबकी निगाहें टिक गईं। उनकी उपलब्धियों में अल्टीमेट टेबल टेनिस के महिला एकल मैच में स्टार खिलाड़ी मनिका बत्रा को हराना भी शामिल है।

सिंड्रेला ने पीटीआई से कहा, ‘‘मैं एशियाई खेलों को लेकर बेहद उत्साहित हूं। हम निश्चित रूप से स्वर्ण पदक जीतने की कोशिश करेंगे। मेरा लक्ष्य जल्द से जल्द विश्व रैंकिंग में शीर्ष 50 में जगह बनाना भी है।’’

सिंड्रेला ने कहा कि यह सत्र उनके लिए सबसे अच्छा रहा है और वह राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने में भी सफल रही लेकिन अब भी बहुत कुछ सीखना बाकी है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह सत्र मेरे लिए बहुत अच्छा रहा है क्योंकि मेरा चयन एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप और युवा ओलंपिक के लिए हो चुका है। मैं अब सीनियर टीम में हूं। बेशक मैंने कई मैच हारे हैं, कई जीते हैं। अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है।’’

सिंड्रेला ने कहा कि जब वह खेल नहीं रही होती हैं तो मानसिक रूप से मजबूत बनने और अपनी गलतियों का विश्लेषण करने पर ध्यान देती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जब मैच नहीं चल रहे होते हैं तो मैं अपनी फिटनेस और मानसिक रूप से मजबूत बनने पर ध्यान केंद्रित करती हूं। मैं सुबह करीब 3-4 घंटे और शाम को 2-3 घंटे अभ्यास करती हूं और अपनी फिटनेस को भी बराबर समय देती हूं।’’

सिंड्रेला ने कहा, ‘‘प्रत्येक प्रतियोगिता के बाद मैं अपने कोच के साथ मिलकर अपने खेल का विश्लेषण करती हूं और उसी के अनुसार सुधार करती हूं। मैं मैच में जो गलतियां करती हूं उन्हें अभ्यास के दौरान सुधारने की कोशिश करती हूं।’’

उन्होंने कहा कि पहले वह दबाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती थी लेकिन अब उन्होंने इससे निपटना सीख लिया है।

सिंड्रेला ने कहा, ‘‘पहले मुझे लगता था कि दबाव ही वो चीज है जो मुझे हमेशा आगे बढ़ने से रोकती है। जब मैंने अपनी मानसिक कोच से बात की तो उन्होंने कहा कि दबाव तो सौभाग्य की बात है। उसके बाद मुझे नहीं लगता कि मैं दबाव की परवाह करती हूं क्योंकि हर कोई इस दबाव का अनुभव नहीं कर सकता।’’

भाषा

पंत मोना

मोना


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