देविका सिहाग ने थाईलैंड मास्टर्स में सफलता का श्रेय सिंधू को दिया

देविका सिहाग ने थाईलैंड मास्टर्स में सफलता का श्रेय सिंधू को दिया

देविका सिहाग ने थाईलैंड मास्टर्स में सफलता का श्रेय सिंधू को दिया
Modified Date: February 4, 2026 / 12:54 pm IST
Published Date: February 4, 2026 12:54 pm IST

(हार्दिक शर्मा)

नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) थाईलैंड मास्टर्स सुपर 300 की विजेता देविका सिहाग ने अपनी इस शानदार जीत का श्रेय दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू के साथ कई महीनों के अभ्यास और मशहूर कोच इरवानस्याह आदि प्रतामा के मार्गदर्शन को दिया।

हरियाणा की यह 20 वर्षीय खिलाड़ी साइना नेहवाल और सिंधू के बाद सुपर 300 महिला एकल खिताब जीतने वाली तीसरी भारतीय महिला शटलर बन गईं है।

देविका ने पीटीआई वीडियो से कहा, ‘‘सिंधू दीदी के खेल को करीब से देखना और उनके साथ अभ्यास करना मेरे लिए बहुत मददगार साबित हुआ। वह बहुत अनुशासित और मेहनती हैं और इससे मुझे भी बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिली। मैं पिछले कुछ महीनों से उनके साथ अभ्यास कर रही हूं।’’

उन्होंने इंडोनेशियाई कोच इरवानस्याह की भूमिका को भी स्वीकार किया, जिन्होंने इससे पहले जोनाथन क्रिस्टी और एंथोनी सिनिसुका गिंटिंग जैसे शीर्ष अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ काम किया है।

देविका ने कहा, ‘‘वह बहुत अनुभवी कोच हैं। वह बड़े टूर्नामेंटों के अपने अनुभव साझा करते हैं और हमें बताते हैं कि खेल में मानसिक और शारीरिक रूप से क्या बदलाव करने की जरूरत है। हर सत्र के बाद वह इन बातों पर चर्चा करते हैं और मैं उन्हें आत्मसात करने का पूरा प्रयास करती हूं।’’

देविका ने खुलासा किया कि वह चीनी-ताइपे की पूर्व विश्व नंबर एक खिलाड़ी ताई त्ज़ु यिंग और सिंधू के खेल की प्रशंसक रही हैं और उनसे प्रेरणा लेती रहती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं शुरू से ही ताई त्ज़ु यिंग और पीवी सिंधू के खेल की प्रशंसक रही हूं। आजकल एन से यंग, ​​अकाने यामागुची और वांग झी खेल में हावी हैं। वे बहुत ही सकारात्मक खेल खेलती हैं और लंबी रैलियां खेल सकती हैं। हमें उनकी गति का मुकाबला करने के लिए शारीरिक रूप से पर्याप्त मजबूत होना होगा।’’

देविका ने कहा, ‘‘इस साल मैंने शीर्ष 30 में पहुंचने का लक्ष्य रखा है। शुरुआत बहुत अच्छी रही है और मैं आगामी प्रतियोगिताओं को लेकर उत्साहित हूं। मुझे उम्मीद है कि मैं हर टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करूंगी।’’

भाषा

पंत

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