उच्च न्यायालय ने ईएफआई के एशियाड ड्रेसेज चयन को सही ठहराया, अनुष और सुदीप्ति की याचिका खारिज की

उच्च न्यायालय ने ईएफआई के एशियाड ड्रेसेज चयन को सही ठहराया, अनुष और सुदीप्ति की याचिका खारिज की

उच्च न्यायालय ने ईएफआई के एशियाड ड्रेसेज चयन को सही ठहराया, अनुष और सुदीप्ति की याचिका खारिज की
Modified Date: June 29, 2026 / 08:59 pm IST
Published Date: June 29, 2026 8:59 pm IST

नयी दिल्ली, 29 जून (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को एशियाई खेलों की ड्रेसेज टीम के लिए भारतीय घुड़सवारी महासंघ (ईएफआई) की चयन प्रक्रिया को सही ठहराते हुए घुड़सवार अनुष अग्रवाला और सुदीप्ति हजेला की याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि खिलाड़ियों का चयन नियमों के अनुसार और निष्पक्ष तरीके से किया गया है जिसमें कोई मनमानी या नियमों का उल्लघंन नहीं हुआ इसलिए इसके लिए अदालत के दखल की जरूरत नहीं है।

न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने फैसला सुनाया कि अदालत विशेषज्ञ चयन संस्थाओं की राय को तब तक नहीं बदल सकती जब तक कि उनके फैसले मनमानी करने वाले, गलत या तय सिद्धांतों के खिलाफ नहीं हों।

दोनों घुड़सवारों ने जापान में एशियाई खेलों की ड्रेसेज स्पर्धा के लिए ईएफआई की तदर्थ समिति द्वारा जारी 16 जून की चयन सूची को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें रिजर्व राइडर (अग्रवाला को पहले रिजर्व और हजेला को दूसरे रिजर्व के तौर पर) के तौर पर रखा गया था जबकि चार राइडर को उनसे पहले चुना गया था।

अदालत ने उनके सभी आरोपों को खारिज कर दिया जिसमें न्यूनतम योग्यता की जरूरत (एमईआर) की गणना पर आपत्ति, चयन मानदंड का मतलब, अतिरिक्त चयन ट्रायल्स की कमी और चयन समिति में भेदभाव के आरोप शामिल थे।

यह मामला 19 सितंबर से चार अक्टूबर तक जापान में होने वाले एशियाई खेलों के लिए भारत की ड्रेसेज टीम के चयन से जुड़ा था।

अग्रवाला का कहना था कि जर्मनी के हेगन में मिले उनके अंक को बेल्जियम के लियर वाले अंक की जगह जोड़ा जाना चाहिए था जिससे उनकी रैंकिंग बेहतर हो जाती। लेकिन अदालत ने कहा कि बेल्जियम प्रतियोगिता में सभी जरूरी टेस्ट हुए थे इसलिए एक प्रतियोगिता का स्कोर हटाकर दूसरी प्रतियोगिता का स्कोर नहीं जोड़ा जा सकता।

अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि बेल्जियम प्रतियोगिता में तीनों तय टेस्ट थे और इसलिए राइडर एक स्कोर को हटाकर दूसरे टूर्नामेंट के बेहतर स्कोर से उसकी जगह नहीं ले सकता था।

अदालत ने उनके इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि चुने गए राइडर श्रुति वोरा और जय सूद को अलग-अलग प्रतिस्पर्धा के स्कोर मिलाकर तरजीह दी गई थी।

कोर्ट ने माना कि दोनों राइडर ने ऐसे टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था, जहां एक जरूरी टेस्ट मौजूद नहीं था और बदले हुए चयन मानदंड का अनुच्छेद 8(ई) खास तौर पर विदेश में मौजूद राइडर को ऐसी स्थितियों में बाद के प्रतिस्पर्धा में छूटे हुए टेस्ट को पूरा करने की इजाजत देता है।

हजेला ने कहा था कि रैंकिंग पहले टीम एमईआर के आधार पर तैयार की जानी चाहिए थी और उसके बाद ही व्यक्तिगत एमईआर प्रदर्शन पर विचार किया जाना चाहिए था।

पर अदालत ने इससे सहमत नहीं था और उसने कहा कि अनुच्छेद 8(एफ) में साफ तौर पर राइडर को उनके दो सबसे अच्छे वैध एमईआर के कुल स्कोर के आधार पर रैंकिंग देने की जरूरत थी।

न्यायमूर्ति पुष्कर्णा ने देखा कि तीनों ड्रेसेज टेस्ट में कुल स्कोरिंग प्रणाली एशियाई खेलों की प्रतिस्पर्धा प्रारूप के मुताबिक थी।

कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि ईएफआई ने 16 जून को सिर्फ छह संभावितों की घोषणा की थी और चार सदस्यों वाली टीम तय करने से पहले उनके बीच फिर प्रतिस्पर्धा कराने की जरूरत थी।

अदालत ने ईएफआई की इस सफाई को मान लिया कि याचिकाकर्ता समेत सभी छह राइडर यूरोप के अलग-अलग हिस्सों में थे जिससे आगे की प्रतियोगिता व्यावहारिक नहीं थी।

फैसले में चयन समिति के सदस्य कपिल मोदी के खिलाफ अग्रवालाा के भेदभाव के आरोप को भी खारिज कर दिया गया।

भाषा नमिता

नमिता


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