फिरोजाबाद के कांच उद्योग को वैश्विक पहचान मिली है: आदित्यनाथ

फिरोजाबाद के कांच उद्योग को वैश्विक पहचान मिली है: आदित्यनाथ

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  • Publish Date - November 25, 2022 / 07:35 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:51 PM IST

फिरोजाबाद (उप्र), 25 नवंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि फिरोजाबाद के कांच उद्योग के अन्तर्गत ग्लास, कांच की चूड़ियों व कलाकृतियों को वैश्विक पहचान मिली है। अकेले फिरोजाबाद ग्लास उद्योग से 1000 करोड़ रुपये सालाना का निर्यात कर रहा है।

उन्होंने कहा कि हमें डिजाइनिंग के साथ पैकेजिंग इंस्टीट्यूट पर भी काम करना होगा। इससे जुड़ते ही यहां से पांच हजार करोड़ रुपये का निर्यात होने लगेगा।

उन्होंने कहा कि फिरोजाबाद के ग्लास उद्योग के आगे दुनिया का उद्योग नहीं ठहरता। उन्होंने कहा कि जब भी किसी विदेशी अतिथि को उपहार देने की बात होती है तो वह यहां से चीजें मंगाकर भेंट करते हैं।

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को सुहागनगरी फिरोजाबाद में प्रबुद्धजन सम्मेलन को संबोधित किया और 269 करोड़ रुपये की 248 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

आदित्यनाथ ने कहा कि फिरोजाबाद नई पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि यह सच है कि यहां के पूर्वजों ने ग्लास उद्योग में पहले भी पहचान बनाई थी, लेकिन समय के साथ यहां की पहचान मिटती गई। उन्होंने कहा कि आलू व ग्लास उद्योग को लोगों ने भुला दिया था पर यह उद्योग फिर नई पहचान बना रहा है। इसके निर्यात को बढ़ाने के लिए उप्र सरकार भरपूर सहयोग करेगी।

उन्होंने कहा कि हमें भी खुले दिमाग से ग्लास उद्योग को सबसे अच्छे केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि हमारी परंपरागत पहचान को डबल इंजन की सरकार बढ़ा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उप्र में अपराधी पलायन कर गए हैं, लेकिन फिर भी कोई अपराधी फिरोजाबाद में व्यापारियों या बहन-बेटियों से दुर्व्यवहार करता है तो उसकी हर गतिविधि कैमरे में कैद होगी और वह अगले चौराहे तक ढेर हो चुका होगा।

उन्होंने कहा कि केन्द्र व प्रदेश सरकार की योजनाओं में सभी को समान अधिकार के साथ उचित स्थान दिया जा रहा है, न तो केंद्र सरकार और न ही प्रदेश सरकार योजनाओं के क्रियान्वयन में कोई भेदभाव कर रही है।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में पांचवी आर्थिक महाशक्ति बनकर उभरा है और इसने देश पर शासन करने वाले ब्रिटेन को पछाड़कर यह उपलब्धि हासिल की है।

भाषा सं जफर

संतोष

संतोष