राज्‍यपाल और मुख्‍यमंत्री ने तीन दिवसीय ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ की शुरुआत की |

राज्‍यपाल और मुख्‍यमंत्री ने तीन दिवसीय ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ की शुरुआत की

राज्‍यपाल और मुख्‍यमंत्री ने तीन दिवसीय ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ की शुरुआत की

: , January 24, 2023 / 03:16 PM IST

लखनऊ, 24 जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में मनाए जा रहे तीन दिवसीय ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ की मंगलवार को शुरुआत की।

इस मौके पर अवध शिल्प ग्राम में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए योगी ने कहा, “भारत में जन्म लेना कठिन है और मनुष्य के रूप में जन्म लेना और भी कठिन है और अगर उत्तर प्रदेश में जन्म लेने का अवसर मिले तो यह हर भारतवासी के लिए गौरव का विषय है।”

उल्लेखनीय है कि प्रदेश के मुख्‍य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश राज्य के स्थापना दिवस पर वर्ष 2018 से लगातार तीन दिवसीय (24-26 जनवरी) आयोजन किया जा रहा है, जिसमें प्रदेश के समस्त विभागों द्वारा अपनी सहभागिता सुनिश्चित की जाती है।

मिश्र ने कहा था कि 24 से 26 जनवरी 2023 तक ‘उत्तर प्रदेश दिवस-2023’ से जुड़ा समारोह आयोजित किए जाने के संबंध में सभी जिलाधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा, “यह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और लीलाधारी श्रीकृष्‍ण की जन्‍म भूमि है। यह तथागत गौतम बुद्ध और गंगा-यमुना की पावन भूमि है। यह अपनी स्थापना का 74वां दिवस ‘उप्र दिवस’ के रूप में एक नए संकल्प के रूप में आयोजित कर रही है।”

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की मंशा है कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बने और उत्तर प्रदेश उसमें ‘ग्रोथ इंजन’ (विकास के इंजन) के रूप में काम करे।

आजादी की लड़ाई में उत्तर प्रदेश के योगदान का जिक्र करते हुए योगी ने मंगल पांडेय, रानी लक्ष्मीबाई, बंधु सिंह, धन सिंह कोतवाल जैसे स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई का गवाह गोरखपुर का चौरीचौरा और लखनऊ का काकोरी कांड भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के वैदिक ज्ञान की आधारभूमि सीतापुर का नैमिषारण्य भी उत्तर प्रदेश में ही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अपने गौरव और गरिमा को लेकर आगे बढ़ रहा है।

योगी ने कहा, “जातिवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद, मत-मजहब के आधार पर विभाजन की रेखाओं ने उत्तर प्रदेश को अपूरणीय क्षति की है। इन विसंगतियों को समाप्त कर उत्तर प्रदेश को सर्वोत्तम राज्य की श्रेणी में खड़ा करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा।”

उत्तर प्रदेश दिवस आयोजित करने का श्रेय पूर्व राज्यपाल राम नाईक को देते हुए योगी ने कहा, “मैं इस बात को विस्मृत नहीं कर सकता कि 2017 में जब ‘डबल इंजन’ की सरकार बनी, तब तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने हम सबको स्मरण कराया कि सभी राज्‍य अपनी स्‍थापना दिवस को अपने दिवस के रूप में आयोजित करते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश ऐसा नहीं करता।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “राम नाईक ने इस आयोजन की अपेक्षा की, तो हमने कहा कि हम यह करेंगे और 2018 की जनवरी आते ही उत्तर प्रदेश दिवस मनाने की शुरुआत हुई। मुझे खुशी है कि पहले स्थापना दिवस पर ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना को आगे बढ़ाया गया था।”

उन्होंने कहा कि आज इस (ओडीओपी) योजना ने उत्तर प्रदेश के निर्यात को दोगुना कर दिया है और राज्य निर्यात केंद्र के रूप में विख्यात हो गया है।

राज्‍यपाल और मुख्‍यमंत्री ने इस मौके पर मुख्यमंत्री हस्तशिल्प पेंशन योजना, हस्तशिल्प विपणन प्रोत्साहन योजना, स्टांप ड्यूटी में छूट समेत कई योजनाओं की शुरुआत की। विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए लोगों को ‘रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार’ और ‘लक्ष्मण पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए उप मुख्‍यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि भाजपा की सरकार बनने से पहले किसी को उत्तर प्रदेश दिवस मनाने की सुध नहीं आई, लेकिन पूर्व राज्यपाल राम नाईक ने इसकी पहल की और मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के नेतृत्व में यह दिवस मनाने की शुरुआत हुई।

पाठक ने कहा कि 2017 से पहले जिस तरह उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था ध्वस्त कर दी गई थी, उसी तरह पर्यटन और संस्कृति का ढांचा भी नष्ट कर दिया गया था, लेकिन मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने माफिया राज का सफाया करने के साथ ही संस्कृति और विरासत को महत्व दिया।

पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने राज्‍यपाल और मुख्‍यमंत्री समेत अन्य अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, मंत्री राकेश सचान, राज्‍य मंत्री गिरीश चंद्र यादव, मुख्‍य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र और प्रमुख सचिव (पर्यटन) मुकेश मेश्राम समेत कई प्रमुख हस्तियां मौजूद थीं।

कार्यक्रम में कलाकारों ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न अंचलों की लोक कलाओं का प्रस्तुतीकरण दिया।

भाषा

आनन्द

मनीषा पारुल

पारुल

 

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)