आज देशभर में भगवान् जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जा रही है। आइये जानते है इस अति महत्वपूर्ण यात्रा से जुड़े तथ्य

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रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा तीनों अलग-अलग रथों में विराजते हैं।

तीनों देवों की यात्रा

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यह दुनिया का सबसे बड़ा और प्राचीन सार्वजनिक धार्मिक रथ उत्सव माना जाता है।

विश्व का विशाल उत्सव

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पुरी में लाखों श्रद्धालु रथ की रस्सी खींचना अत्यंत शुभ और पुण्यदायक मानते हैं।

रस्सी खींचने का पुण्य

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भगवान स्वयं भक्तों के बीच निकलकर सबको समान रूप से दर्शन देने आते हैं।

भक्तों के बीच भगवान

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तीनों रथ हर वर्ष नई लकड़ियों से बनाए जाते हैं, पुराने रथ पुनः उपयोग नहीं होते।

हर वर्ष नए रथ

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रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं।

मौसी घर की यात्रा

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यात्रा से पहले गजपति महाराज सोने की झाड़ू से रथों की सफाई करते हैं।

राजा लगाते हैं झाड़ू

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रथयात्रा के नौ दिन बाद भगवान पुनः श्रीमंदिर लौटते हैं, इसे बहुदा यात्रा कहते हैं।

बहुदा यात्रा का महत्व

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भगवान जगन्नाथ की बड़ी गोल आँखें संपूर्ण संसार पर उनकी समान दृष्टि का प्रतीक हैं।

दिव्य नेत्रों का संदेश

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रथयात्रा का संदेश है कि भगवान बिना किसी भेदभाव के सभी भक्तों के हैं।

समानता का दिव्य संदेश

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