छत्तीसगढ़ का खास पर्व

पोला तिहार छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और कृषि परंपरा से जुड़ा प्रमुख पर्व है।

कब मनाया जाता है?

पोला पर्व भाद्रपद महीने की अमावस्या को मनाया जाता है। यह किसानों के लिए खास दिन होता है।

हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।

बैलों की होती है पूजा

इस दिन किसान बैलों को नहलाकर सजाते हैं और उनके सींगों पर रंग लगाकर पूजा-अर्चना करते हैं।

हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।

बैलों को मिलता है आराम

खेती में सालभर साथ देने वाले बैलों को पोला के दिन कृषि कार्य से आराम दिया जाता है।

हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।

गांवों में बैल दौड़ का उत्साह

कई ग्रामीण इलाकों में पोला के मौके पर पारंपरिक बैल दौड़ और अन्य आयोजन किए जाते हैं।

हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।

बच्चों का पसंदीदा नंदिया बैला

पोला पर मिट्टी से बने नंदिया बैला बच्चों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहते हैं। इसे भगवान शिव के वाहन नंदी का प्रतीक माना जाता है।

हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।

छत्तीसगढ़ी पकवानों की खुशबू

त्योहार पर घरों में ठेठरी, खुरमी, चिल्ला और गुलगुला भजिया जैसे पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं।