जन्माष्टमी के अगले दिन दही हांडी
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन
दही हांडी उत्सव
मनाने की परंपरा है।
भगवान कृष्ण की बाल लीला
दही हांडी उत्सव भगवान श्रीकृष्ण की
माखन चोरी वाली बाल लीलाओं
से जुड़ा है।
हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।
क्यों कहलाए माखनचोर?
मान्यता है कि बाल कृष्ण पड़ोस के घरों से
मटकी फोड़कर माखन चुराया
करते थे।
हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।
कैसे मनाया जाता है उत्सव?
दही या माखन से भरी
मटकी ऊंचाई पर लटकाई
जाती है, जिसे गोविंदाओं की टोली तोड़ती है।
हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।
गोविंदा बनाते हैं मानव पिरामिड
गोविंदाओं की टोली एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर
मानव पिरामिड
बनाती है और हांडी फोड़ती है।
हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।
जीतने वाली टीम को इनाम
जो टीम सबसे पहले दही हांडी फोड़ती है, उसे
विजेता घोषित कर पुरस्कार
दिया जाता है।
हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।
महाराष्ट्र में खास धूम
दही हांडी उत्सव की सबसे ज्यादा धूम
महाराष्ट्र और गोकुल
में देखने को मिलती है।
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