भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा हिंदू धर्म के सबसे बड़े और पवित्र उत्सवों में से एक मानी जाती है। हर साल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को यह यात्रा निकाली जाती है।
मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी गुंडिचा देवी के मंदिर जाने के लिए रथ पर सवार होकर निकलते हैं। यह यात्रा भक्तों से मिलने और उन्हें आशीर्वाद देने का प्रतीक मानी जाती है।
भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष, बलभद्र का तालध्वज और देवी सुभद्रा का दर्पदलन नामक रथ होता है। हर वर्ष इन रथों का नया निर्माण किया जाता है।
कुछ दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहने के बाद भगवान की बहुदा यात्रा निकाली जाती है, जिसमें वे वापस श्रीमंदिर लौटते हैं।
पुरी की रथ यात्रा में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। यह उत्सव श्रद्धा, सेवा, समानता और भक्ति का अद्भुत संगम माना जाता है।