NEET-UG पेपर लेक विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। जानें उन मंत्रियों के बारें में जिन्होनें कार्यकाल से पहले ही पद छोड़े हैं।

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रेल हादसे में सैकड़ों मजदूरों की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार कर रेल मंत्री पद से रिजेक्शन दिया।

लाल बहादुर शास्त्री (1956)

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भारत-चीन युद्ध में सैन्य विफलता और भारी जन-राजनीतिक दबाव के बाद रक्षा मंत्री पद छोड़ दिया।

वी.के. कृष्ण मेनन (1962)

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बोफोर्स सौदे की जांच और सरकार से टकराव बढ़ने पर रक्षा मंत्री पद से रिजेक्शन दिया।

वी.पी. सिंह (1987)

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ए. राजा ने 2G स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले के आरोपों और राजनीतिक दबाव के कारण इस्तीफ़ा दिया।

ए. राजा (2010)

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एयरसेल-मैक्सिस सौदे में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल छोड़ दिया।

दयानिधि मारन (2011)

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रेलवे भर्ती रिश्वत मामले में भांजे की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक दबाव में इस्तीफा दिया।

पवन कुमार बंसल (2013)

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कोलगेट (कोयला ब्लॉक आवंटन) घोटाले की सीबीआई जांच रिपोर्ट में फेरबदल करने के विवाद में इस्तीफा।

अश्वनी कुमार (2013)

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#MeToo उत्पीड़न आरोपों के बाद इस्तीफा दिया।

एम.जे. अकबर (2018)

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कृषि कानूनों के विरोध और किसानों के समर्थन में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री पद छोड़ दिया।

हरसिमरत कौर बादल (2020)

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NEET पेपर लीक मामले का विरोध और राजनीतिक दबाव के बीच केंद्रीय मंत्री पद छोड़ दिया।

धर्मेंद्र प्रधान (2026)

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