भारत में कोई भी खुशी बिना मीठे के अधूरी मानी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी पसंदीदा मिठाइयों का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है और इनमें से कुछ तो राजा-महाराजाओं के शाही रसोईघर में पहली बार बनी थीं? आइए जानते हैं!
मैसूर पाक (Mysore Pak) 1935 में मैसूर पैलेस के शाही शेफ मडप्पा ने राजा कृष्णराज वोडेयार के लिए बेसन, घी और चीनी मिलाकर एक नई मिठाई बनाई। जब राजा ने नाम पूछा, तो उन्होंने इसे नाम दिया 'मैसूर पाक' ('पाक' यानी मीठा सिरप)।
राजस्थान का 'घेवर' मधुमक्खी के छत्ते जैसी बनावट वाला घेवर राजस्थान की पारंपरिक मिठाई है, जिसका ज़िक्र प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी मिलता है। इसे खास तौर पर बारिश के मौसम (सावन) में बनाया जाता है ताकि हवा की नमी इसे सही टेक्सचर दे सके।
रसमलाई / रसगुल्ला ओडिशा के जगन्नाथ मंदिर में 800 साल से 'खीर मोहन' के रूप में रसगुल्ला चढ़ाया जाता रहा है। वहीं, 1868 में कोलकाता के नवीन चंद्र दास ने इसे स्पंजी रूप दिया। दूध को फाड़कर छैना बनाने की तकनीक पुर्तगालियों के आने के बाद भारत में लोकप्रिय हुई।
बालूशाही (Balushahi) उत्तर भारत की मशहूर बालूशाही असल में मध्य-पूर्व (Middle East) के पेस्टी कल्चर से प्रेरित मानी जाती है। मैदे के पेड़े को धीमी आंच पर देसी घी में तलकर चाशनी में डुबोया जाता है। इसे अक्सर 'इंडियन डोनट' भी कहा जाता है।
मोदक (Modak) मोदक का इतिहास वैदिक काल से मिलता है। संस्कृत में 'मोद' का अर्थ होता है आनंद या खुशी। चावल के आटे में गुड़ और नारियल की स्टफिंग भरकर स्टीम किया जाने वाला उकडीचे मोदक महाराष्ट्र और दक्षिण भारत की सबसे प्राचीन मिठाइयों में से एक है।