Image: Twitter/Social Media
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आयुर्वेद में तांबे (Copper) के बर्तन में रखा पानी पीना सेहत के लिए अमृत माना गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत तरीके से पिया गया यही पानी शरीर के लिए 'जहर' भी बन सकता है? आइए जानते हैं इसके जरूरी नियम और 5 बड़ी गलतियां।
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कई लोग सुबह उठकर तांबे के बर्तन के पानी में नींबू और शहद मिलाकर पीते हैं। नींबू में मौजूद एसिड तांबे के साथ तुरंत रसायनिक क्रिया (Chemical Reaction) करता है, जिससे पेट में भयंकर इंफेक्शन, दर्द और उल्टी की समस्या हो सकती है।
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तांबे का पानी रोज़ पीना सही है, लेकिन लगातार नहीं। आयुर्वेद के अनुसार, 3 महीने लगातार तांबे के बर्तन का पानी पीने के बाद कम से कम 1 महीने का गैप (Break) जरूर देना चाहिए, ताकि शरीर में अत्यधिक कॉपर जमा (Copper Toxicity) न हो।
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कुछ लोग तांबे की बोतल में तुरंत पानी भरते हैं और पी लेते हैं, जिससे कोई फायदा नहीं होता। पानी में तांबे के गुण आने के लिए उसे कम से कम 8 से 12 घंटे तक उसी बर्तन में शांत रखा छोड़ना जरूरी है। इसीलिए रात को भरकर सुबह पीना सबसे बेस्ट है।
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तांबे के बर्तन को रात भर के लिए कभी भी सीधे जमीन या मार्बल के फर्श पर न रखें। जमीन पर रखने से इसकी चुंबकीय और थर्मल ऊर्जा नष्ट हो जाती है। इसे हमेशा किसी लकड़ी के स्टूल, टेबल या थाली के ऊपर ही रखें।
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हवा और पानी के संपर्क में आने से तांबे के अंदर एक हरी या काली ऑक्सीकरण परत (Oxidation) जम जाती है। अगर आप इसे रोज़ सिर्फ सादे पानी से धोकर दोबारा इस्तेमाल करते हैं, तो वह गंदगी आपके पेट में जाती है। इसे हमेशा नींबू-नमक या इमली से चमकाकर रखें।