पितरों के तर्पण और श्राद्ध के लिए पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू हो रहा है। इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा।
कब-कब होगा श्राद्ध?
आज 26 सितंबर को पूर्णिमा का श्राद्ध होगा, जबकि 27 सितंबर से पड़वा का श्राद्ध शुरू होगा। इस बार चतुर्थी और पंचमी का श्राद्ध एक ही दिन, 30 सितंबर को होगा।
हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।
श्राद्ध में क्या बनाएं?
श्राद्ध के भोजन में जौ, मूंग, गेहूं, धान, तिल, मटर, कचनार और सरसों जैसी चीजों का इस्तेमाल शुभ माना गया है।
हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।
इन चीजों से करें परहेज
श्राद्ध में मसूर, उड़द, प्याज, शलजम, गाजर, कद्दू, हींग और लाल रंग की वस्तुओं को त्याज्य बताया गया है। बासी या अशुद्ध भोजन भी नहीं रखना चाहिए।
हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।
श्राद्ध में किस दूध का करें इस्तेमाल?
श्राद्धकर्म के लिए दूध की जरूरत हो तो गाय के दूध का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऊंटनी, भेड़, मृगी और भैंस के दूध का इस्तेमाल नहीं करने की बात शास्त्रों में कही गई है।
हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।
पवित्रता का रखें खास ध्यान
श्राद्ध का भोजन बनाते समय साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भोजन में बाल, नाखून, कीड़े या बासी अन्न नहीं होना चाहिए।
पितरों की विदाई कैसे होती है?
पितृपक्ष की शुरुआत में पितरों का स्वागत कर उनके लिए भोजन और तर्पण किया जाता है। समापन के दिन रात में मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर पितरों के विसर्जन की परंपरा है।