छत्तीसगढ़ का खास कृषि पर्व

पोरा छत्तीसगढ़ का प्रमुख लोकपर्व है, जो खेती-किसानी और किसानों की परंपराओं से गहराई से जुड़ा है।

कब मनाया जाएगा पोला?

साल 2026 में छत्तीसगढ़ में पोरा पर्व 10 सितंबर, गुरुवार को धूमधाम से मनाया जाएगा।

हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।

क्यों मनाया जाता है पोरा?

खरीफ फसल की निंदाई-गुड़ाई पूरी होने और फसलों के बढ़ने की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है।

हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।

अन्नमाता के गर्भधारण की मान्यता

मान्यता है कि पोरा के दिन अन्नमाता गर्भ धारण करती हैं और धान के पौधों में दूध भरना शुरू होता है।

हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।

बैलों की होती है विशेष पूजा

किसान बैलों को नहलाकर उनके सींग और खुर सजाते हैं। इसके बाद पूजा और आरती कर उनके प्रति आभार जताते हैं।

हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।

घरों में बनते हैं छत्तीसगढ़ी पकवान

पोरा पर घरों में गुड़हा, चीला, अनरसा, सोहरी, चौसला, ठेठरी, खुरमी, बरा और भजिया जैसे पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं।

हमारी अवाज महज ध्वनि नहीं, हमारे आत्मा की अभिव्यक्ति है।

मिट्टी के खिलौनों की परंपरा

बच्चों के लिए मिट्टी के बैल और छोटे-छोटे बर्तन लाए जाते हैं। पूजा के बाद बच्चे इनसे खेलते हैं और परंपराओं से जुड़ते हैं।